जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के साथ अंतरराष्ट्रीय तनाव के कई स्थलों पर तुरंत सुधार होने की उम्मीद जोड़ी गई थी। लेकिन उनमें से एक उम्मीद को गहरा धक्का लगा है। राष्ट्रपति बाइडन ने ईरान के साथ परमाणु डील में अमेरिका के जल्द लौटने की संभावना पर फिलहाल पानी डाल दिया है। अब संकेत यह है कि दोनों पक्षों में पहले कौन पहल करेगा, इसको लेकर अमेरिका और ईरान समान धरातल पर नहीं हैं।
रविवार रात (भारतीय समय के अनुसार) एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दो टूक कहा कि जब तक ईरान यूरेनियम का संवर्धन नहीं रोकता, अमेरिका उस पर लगाए गए प्रतिबंधों को नहीं हटाएगा। जबकि इसके इंटरव्यू के कुछ घंटे पहले ही ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली खामेनई ने कहा था कि अगर अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु डील में किए गए अपने वायदों को निभाए, तो उसे पहले सभी प्रतिबंध हटा लेने चाहिए।
विश्लेषकों ने कहा है कि टीवी चैनल सीबीएस को दिए इंटरव्यू में जो बाइडन ने यह संकेत देने की कोशिश की कि ईरान परमाणु डील में अपने देश को वापस लाने का उनका इरादा उनकी कमजोरी का सूचक नहीं है। अमेरिका में इस्राइल समर्थक मजबूत लॉबी है, जो शुरू से समझौते के खिलाफ रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी लॉबी को अपने हक में करने की कोशिश में ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को निकाला था। इस मुद्दे पर तब उनकी यूरोपीय देशों के साथ भी कड़वाहट हो गई थी, जिन्हें आम तौर पर अमेरिका का सहयोगी समझा जाता है।
परमाणु समझौता 2015 में हुआ था। इसे संपन्न कराने में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गहरी दिलचस्पी ली थी। इस समझौते पर एक तरफ से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों और जर्मनी और दूसरी तरफ से ईरान ने दस्तखत किए थे। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश हैं। समझौते का मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था।
लेकिन 2018 में ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते से अमेरिका को निकाल लिया और ईरान पर नए सख्त प्रतिबंध लगा दिए। ट्रंप की दलील थी कि इस समझौते में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इस समझौते के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हुई है। 2019 में ईरान ने भी इस समझौते का पालन रोक दिया। हालांकि बाकी पांचों देश समझौते में बने रहे हैं, लेकिन ईरान के यूरेनियम का संवर्धन शुरू कर देने से ये समझौता हर व्यावहारिक रूप में निष्क्रिय हो गया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनई ने रविवार को ईरानी मीडिया से कहा- ‘अमेरिका को सारे व्यवहार में प्रतिबंध हटा लेने चाहिए। उसके बाद हम उसका सत्यापन करेंगे। तभी हम फिर से अपने वादे निभाने की तरफ लौटेंगे।’ दूसरी तरफ सीबीएस के इंटरव्यू में जो बाइडन से पूछा गया कि क्या अमेरिका पहले प्रतिबंध हटाएगा, ताकि ईरान बातचीत की मेज पर वापस आ सके। इस पर बाइडन ने कहा- नहीं।
खमेनई ने कहा है कि ईरान ने समझौते के तहत अपनी सारी वचनबद्धताओं को निभाया था। जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अपने वादे तोड़ दिए। इसलिए अगर वे चाहते हैं कि ईरान अपने वायदों पर लौटे, तो अमेरिका को पहले सारे प्रतिबंध हटाने होंगे। पिछले नवंबर में जो बाइडन के राष्ट्रपति चुनाव में विजयी होने के बाद ईरान ने उम्मीद जताई थी कि नया अमेरिकी प्रशासन ईरान पर लगे सारे प्रतिबंधों को हटा लेगा।
लेकिन उसकी ये उम्मीद पूरी नहीं हुई। इसलिए जनवरी में ईरान ने बाइडन और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन की आलोचना शुरू कर दी। इसके पहले ब्लिंकेन का ये बयान आया था कि प्रतिबंध हटाए जाएं, इसके पहले ईरान को अपने वायदों पर लौटना होगा। अब राष्ट्रपति बाइडन ने भी ये बात कह दी है। इससे अमेरिका-ईरान संबंधों का तनाव घटने की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।