हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को पुनर्जीवित करने और चीनी राष्ट्रगान के अपमान को अपराध के दायरे में लाने को लेकर विधेयक लाया जा रहा है। इस पर संसद में बुधवार को चर्चा से पहले कार्रवाई चालू न करने की मांग की गई। इसे लेकर शहर में तनाव बढ़ गया और हांगकांग दंगा पुलिस ने यहां एकत्रित होने की योजना बनाते प्रदर्शनकारियों पर काली मिर्च की गोलियां दागीं।
बीजिंग की तरफ से प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को हांगकांग में लागू करने पर संसद में जारी चर्चा को बाधित न होने देने के चलते दंगा पुलिस का इंतजाम किया गया था। इस बीच सत्र से पहले विधान भवन के बाहर जब प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए तो पुलिस ने उन पर मुकदमा चलाने की चेतावनी भी दी। लेकिन जब वे नहीं हटे तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए काली मिर्च की गोलियां दागना शुरू कर दिया। मिर्च स्प्रे के साथ दंगा पुलिस ने पत्रकारों को वीडियोग्राफी करने से भी रोका।
अनधिकृत सूत्रों के हिसाब से यहां पुलिस ने करीब 300 लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि इसके बावजूद लोगों ने काले कपड़े पहने और काला झंडा उठाकर विधेयक का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विधेयक पास होने के बाद चीन उनकी विरोध की आवाज को दबा देगा।
अभिव्यक्ति की आजादी को करारा झटका
इस विधेयक के बाद ‘मार्च ऑफ द वॉलंटियर’ का अपमान करना गैरकानूनी हो जाएगा। जो दोषी पाया जाएगा उसे तीन साल तक की जेल हो सकती है और उस पर 6,450 डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रगान विधेयक शहर में अभिव्यक्ति की आजादी को करारा झटका है।
चीन के कानून से अमेरिका नाखुश, ट्रंप लेंगे बड़ा फैसला
कोरोना वायरस संकट के चलते दुनिया भर में आलोचना झेल रहे चीन पर हांगकांग मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ने करारी लताड़ लगाई है। इससे दोनों देशों में और तनाव बढ़ सकता है। ट्रंप ने कहा, चीन राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हांगकांग में जो कुछ भी कर रहा है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। हम इस पर जल्द ही फैसला लेंगे। उन्होंने कहा, "आप इसके बारे में जल्द ही सुनेंगे, शायद इसी हफ्ते सुनेंगे। हम बहुत कठोर जवाब देंगे।" हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि वह चीन पर क्या कदम उठाने वाले हैं। लेकिन इससे पहले व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैली मैकनेनी कह चुकी हैं कि ट्रंप चीन की तरफ से लाए गए सुरक्षा कानून से नाराज हैं और राष्ट्रपति को लगता है कि अगर चीन ने सत्ता संभाली तो हांगकांग का एक वित्तीय केंद्र बना रहना मुश्किल होगा।