दक्षिण अफ्रीका में मुक्ति संग्राम और मानवाधिकार योद्धा नेल्सन मंडेला से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को शनिवार को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र के दौरान यह घोषणा की गई।
दक्षिण अफ्रीका के महान पुरुषों में से एक और मुक्ति संग्राम के प्रणेता नेल्सन मंडेला से जुड़े तमाम ऐतिहासिक स्थल अब यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गए हैं। भारत में आयोजित 46वें सत्र के दौरान जैसे ही इसकी घोषणा विश्व धरोहर समिति ने की, इसके बाद दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल के तमाम सदस्य जश्न मनाने लगे।
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इन देशों ने किया नामांकन का समर्थन
बता दें कि अफ्रीकी देश ने 'मानवाधिकार, मुक्ति संग्राम और सुलह: नेल्सन मंडेला विरासत स्थल' नाम से नामांकन प्रस्तुत किया। जिसका इटली, दक्षिण कोरिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, जापान समेत कई राज्य दलों ने नामांकन का समर्थन किया। वहीं इस पर टिप्पणी करते हुए एक जापानी प्रतिनिधि ने कहा कि ये स्थल सभी मानव जाति के लिए असाधारण महत्व रखते हैं।
दक्षिण अफ्रीका ने भारत को दिया धन्यवाद
वहीं दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल की एक सदस्य ने अपने देश की ओर से बयान देते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र की मेजबानी करने के लिए भारत को धन्यवाद भी दिया। बता दें कि भारत विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले भारत के असम राज्य में मौजूद पुरातन स्थल मोइदम को भी विश्व धरोहर का दर्जा मिला है।
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जाने क्या है अहोम मोइदम ?
असम के चराइदेव जिले में मौजूद अहोम युग का 'मोइदम' पिरामिड सरीखी अनूठी टीलेनुमा संरचना है। जिसका इस्तेमाल ताई-अहोम वंश द्वारा अपने राजवंश के सदस्यों को उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ दफनाने के लिए किया जाता था। अहोम मोइदम का क्षेत्रफल 95.02 हेक्टेयर है और इसका बफर जोन 754.511 हेक्टेयर है। जानकारी के मुताबिक चराइदेव में मौजूद मोइदम के भीतर 90 संरचनाएं हैं, जो ऊंची भूमि पर स्थित है। जानकारी के मुताबिक इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने की सिफारिश अंतरराष्ट्रीय सलाहकार संस्था आईसीओएमओएस ने की थी। अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद (आईसीओएमओएस) ने 'सांस्कृतिक एवं मिश्रित संपत्तियों के नामांकन का मूल्यांकन' रिपोर्ट तैयारी की थी।