पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमले व उनकी हत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब खबर मिली है कि सिंध प्रांत के सुक्कुर शहर में नाई की दुकान पर बाल कटवा रहे 31 वर्षीय हिंदू पत्रकार अजय लालवानी की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
डेली पुचानों के रिपोर्टर थे लालवानी
घटना की जानकारी शनिवार को मीडिया में आई। पाकिस्तानी अखबार ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ ने खबर दी कि अजय लालवानी एक स्थानीय टेलीविजन चैनल और उर्दू भाषा के अखबार ‘डेली पुचानो’ में रिपोर्टर थे। बताया गया है कि बृहस्पतिवार को हुए हमले में उनके पेट, बांह और घुटने में गोली लगने से उनकी मौत हो गई।
सुक्कर शहर में हुआ हमला
वह सुक्कुर शहर में नाई की दुकान में बैठे थे, तभी दो मोटरसाइकिल एवं एक कार में सवार हमलावरों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। लालवानी को नजदीक के अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। खबरों के मुताबिक, उनके पिता दिलीप कुमार ने कहा कि उनके परिवार की किसी से दुश्मनी नहीं थी और पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया कि निजी दुश्मनी के कारण उनकी हत्या हुई।
पाकिस्तान की वेबसाइट 'द न्यूज' के मुताबिक, 15 मार्च को पुलिस ने उन पत्रकारों के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के आरोप में दर्ज किया था, जिन्होंने पुलिस के खिलाफ हालिया प्रदर्शन को कवर किया था। सीपीजे की एक रिपोर्ट के अनुसार, लालवानी स्थानीय पत्रकारों के एक संगठन सिंध पत्रकार परिषद में सक्रिय सदस्य थे, जो इस तरह के प्रदर्शनों को कवर करने में लगे हुए थे।
डेली पुचानो के संपादक, आशिक जतोई ने कहा कि लालवानी सुक्कुर के सालेहपाट इलाके में एक नाई की दुकान में बैठे थे जब दो मोटरसाइकिल और चार यात्रियों के साथ एक कार वहां पहुंची और गोलियां चलानी शुरू कर दी लालवानी को पेट, हाथ और घुटने में गोली लगी।
हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत का कारण क्या था, क्षेत्र के पुलिस प्रमुख, आशिक मीरानी ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि क्या लालवानी को "पेशेवर कर्तव्यों" के कारण मारा गया था।
नेशनल असेंबली में उठा मामला, पत्रकारों ने किया प्रदर्शन
पुलिस ने शुक्रवार को तीन अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू कर दी। हत्या की निंदा करते हुए पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में हिंदू सदस्य लालचंद मल्ही ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है। पत्रकारों के एक समूह ने लालवानी की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके अंतिम संस्कार के बाद मार्च निकाला।