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कुलभूषण जाधव मामले में वकील हरीश साल्वे ने बताया कि पाक को कैसे मिली कानूनी हार

Thu, 18 Jul 2019 01:30 AM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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वकील हरीश साल्वे - फोटो : एएनआई
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कुलभूषण जाधव केस में भारत के प्रमुख वकील हरीश साल्वे ने बुधवार को कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) के फैसले से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि आईसीजे के फैसले ने जाधव की फांसी पर रोक लगाकर उनके लिए न्याय सुनिश्चित किया है। 

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आईसीजे के अध्यक्ष जज अब्दुलकवी अहमद यूसुफ की अगुआई वाली 16 सदस्यीय बेंच ने 15-1 के बहुमत से पाकिस्तान को जाधव को सुनाई गई सजा की समीक्षा का आदेश दिया। एकमात्र पाकिस्तान के जज इस फैसले के पक्ष में नहीं थे, अन्य 15 में से एक भी जज का समर्थन पाकिस्तान को नहीं मिला। यानी कि पाकिस्तान को इस फैसले में भी मुंह की खानी पड़ी। 

साल्वे ने कहा कि भारत का अगला कदम यह सुनिश्चित करने का होगा कि जाधव पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक निष्पक्ष मुकदमे का सामना करें और उन्हें न्याय मिले। 

 

उन्होंने लंदन में भारतीय उच्चायोग में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि आईसीजे के फैसले में जाधव की सजा की कारगर समीक्षा और उस पर पुनर्विचार करने को कहा गया है। इससे स्पष्ट है कि उन्हें कॉन्सुलर एक्सेस मिलेगी। कारण कि पाकिस्तान ने वियना संधि का उल्लंघन किया था। 

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लंदन में मीडिया को संबोधित करते हुए साल्वे ने कहा कि हमारे लिए यह सुनिश्चित करने का वक्त है कि जाधव के मामले में अब निष्पक्ष सुनवाई होगी। यदि पाकिस्तान अभी भी इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं करता है, तो हम एक बार फिर से आईसीजे जा सकते हैं। अगर पाकिस्तानी कोर्ट सैन्य कोर्ट में ही दोबारा जांच कराता है तो इसकी इजाजत हम नहीं दे सकते। ऐसे में बाहरी वकील का प्रवेश नहीं होगा, जो कि न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा।

साल्वे ने कहा, 'एक वकील के तौर पर मैं बेहद संतुष्ट हूं। इस फैसले से मुझे राहत मिली है....कोर्ट ने कहा कि फांसी का कोई सवाल ही नहीं है...इसलिए मैं बहुत खुश हूं।'  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कोर्ट में जिन उपमाओं का इस्तेमाल किया है, उन्हें मैं व्यक्तिगत तौर पर उसे दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं।

पाकिस्तान ने आइसीजे में अपना पक्ष रखते हुए गलत बयानबाजी कर रहा था। यह मेरे संस्कार हैं कि मैंने भारतीय परंपरा के हिसाब से कोर्ट में अपना मत रखा, जो भारत की संस्कृति दर्शाता है। 

मालूम हो कि 49 साल के कुलभूषण जाधव इंडियन नेवी के रिटायर्ड ऑफिसर हैं। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने बंद कमरे में चली सुनवाई के बाद अप्रैल 2017 में जाधव को 'जासूसी और आतंकवाद' के आरोप में फांसी की सजा सुनाई थी। उनकी सजा पर देश भर में उठ रहे विरोधों के बीच भारत ने पाकिस्तान के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
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