निवर्तमान ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा के लिए चयन प्रक्रिया में अहम संशोधन कर दिया है। इस बदलाव के बाद एच-1बी वीजा चयन, मौजूदा लॉटरी प्रक्रिया के बजाय वेतन और कौशल को प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा। यह अधिसूचना संघीय रजिस्टर में प्रकाशित हो चुकी है और 60 दिनों में लागू होगी।
यह एक गैल-आप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को तकनीकी विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करने की अनुमति देता है। भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के आधार पर होती है।
अगले एच-1बी वीजा को दाखिल करने का सत्र एक अप्रैल से शुरू होने वाला है, ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में जब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है तब अमेरिका में विदेशी कामगारों की एंट्री रोकने का यह नवीनतम प्रयास है।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह संशोधन भारतीय कंपनियों को किस तरह से प्रभाति करेगा, क्योंकि आगामी बाइडन प्रशासन द्वारा अधिसूचना की समीक्षा करने की पूरी संभावना है। अभी तक ट्रंप प्रशासन की अधिसूचना पर कंपनियों अथवा व्यावसायिक निकायों की कोई प्रतिक्रिया नहीं है।
31 मार्च तक हाल ही में बढ़ाईं वीजा पाबंदियां
पिछले सप्ताह ही ट्रंप ने एच-1बी वीजा पाबंदी को अन्य प्रकार के वर्क वीजा और ग्रीन कार्ड के साथ 31 मार्च तक बढ़ाया था। पिछले साल अक्तूबर में लगाई गई ये पाबंदियां 31 दिसंबर को ही समाप्त होनी थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान पहले दिन से ही विदेशियों के देश में प्रवेश के पक्ष में नहीं रहे हैं। उन्होंने पहले दिन से ही सात मुस्लिम बहुल देशों के विरुद्ध यात्रा प्रतिबंध जारी किए।
अमेरिकी नागरिकों के हित में लिया फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एच-1बी वीजा के लिए चयन प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि ये संशोधन अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा को देखते हुए किए गए हैं। इसके बाद लॉटरी आधार पर वीजाधारकों का चयन होने के बजाय उन्हें मिलने वाले ऊंचे वेतन के आधार पर होगा। इसके चलते कंपनियां विदेशी कामगारों का चयन करने में हिचकिचाएंगी और देश में उनकी संख्या कम हो जाएगी।
बाइडन कर सकते हैं समीक्षा
अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन शुरू से ही ट्रंप के वीजा प्रतिबंधों के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप की नीतियों को क्रूर बताते हुए खुलकर कहा कि वे इन पाबंदियों को हटाएंगे। बाइडन पर अमेरिकी कंपनियों और भारतीय-अमेरिकियों का दबाव है कि वे इन पाबंदियों को हटाएं। इसलिए शपथ के बाद वे नए नियमों की समीक्षा कर सकते हैं।