ईरान की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और ईरान नए दोस्त नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितना इतिहास। उन्होंने कहा कि एक दोस्त और पड़ोसी के रूप में दोनों देशों ने एक दूसरे से विकास और खुशहाली को साझा किया है।
मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वो इस बात को नहीं भूल सकते हैं कि गुजरात में 2001 में भूकंप के बाद ईरान पहला देश था, जो मदद के लिए आगे आया था। इस मौके पर भारत और ईरान ने आपसी सहयोग के 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
इनमें सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन और चाबहार-ज़ाहेडान के बीच रेलवे लाइन बिछाने संबंधी समझौते प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़ी बुनियादी संरचना के विकास के लिए जो समझौता हुआ है, वह मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध के खतरे से निपटने के लिए दोनों देश नियमित विचार-विमर्श पर सहमत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन का अंत मिर्जा गालिब के इस शेर से किया
नूनत गरबे नफ्से-ख़ुद तमाम अस्त।ज़े-काशी पा-बे काशान नीम गाम अस्त।
यानी अगर हम अपना मन बना लें तो काशी और काशान के बीच की दूरी केवल आधा कदम होगी। वहीं जब मोदी शेर पढ़ रहे थे तो ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी मुस्करा रहे थे। उन्होंने कहा कि चाबहार बदंरगाह भारत-ईरान के बीच सहयोग का बहुत बड़ा प्रतीक बन सकता है।