3. प्रिंस सऊद बिन सैफ अल नस्र- रुतबे के लिहाज से वह सऊदी राजघराने में निचले पायदान पर आते थे। 2014 में उन्होंने ट्विटर के जरिए
सऊदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। इटली के मिलान शहर में उनका ठिकाना था। कसिनो और लग्जरी होटलों के शौकीन नस्र के समर्थकों ने सत्ता पर काबिज शाह को उखाड़ने के लिए बड़े विरोध प्रदर्शन की अपील की थी। उन्हें एक रूसी कंपनी ने बिजनेस डील का प्रस्ताव दिया। रोम में होने वाली इस डील के लिए कंपनी ने उनके लिए एक विमान भेजा। विमान मिलान से रवाना तो हुआ लेकिन रोम नहीं बल्कि रियाद में उतरा। इसके बाद नस्र कहां गए यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है।
4. खालेद बिन फरहान अल सऊद- खालेद साल 2004 में सऊदी अरब से भागकर जर्मनी चले गए थे। आज भी सऊदी सरकार उन्हें देश वापस लाने की कोशिश कर रही है। उनके लिए कई बार जाल बिछाया गया लेकिन खुशकिस्मती से वह उसमें नहीं फंसे इसलिए अबतक बचे हुए हैं। खालेद के अनुसार सऊदी एजेंटों ने उनके रिश्तेदारों के जरिए एक बहुत बड़ी रकम का प्रस्ताव दिया था और काहिरा स्थित सऊदी दूतावास बुलाया था। लेकिन वह पैसे लेने के लिए नहीं गए। खालेद के मुताबिक सऊदी सरकार अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी शख्स को नहीं छोड़ती है।