पिछले दो सालों से यूरोप में रह रहे सऊदी अरब के तीन राजकुमार गायब हो गए हैं। सभी सऊदी सरकार के लिए महत्वपूर्ण थे और ऐसे सबूत पाए गए हैं कि सभी का अपहरण कर उन्हें वापस सऊदी अरब भेज दिया गया था।
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12 जून 2003 की सुबह सऊदी के एक राजकुमार जेनेवा (स्विट्जरलैंड) के बाहरी इलाके में स्थित एक महल में पहुंचे। उनका नाम सुल्तान बिन तुर्की बिन अब्दुलअजीज था और वह महल उनके स्वर्गीय चाचा किंग फहद से संबंधित था। फहद के बेटे प्रिंस अब्दुलअजीज बिन फहद ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया था।
'नकाबपोश लोगों ने गर्दन में घोंप दी सुई'
अब्दुलअजीज ने सुल्तान से कहा कि वह वापस सऊदी अरब लौट चलें और सुल्तान द्वारा की गई सऊदी नेतृत्व की आलोचना का मसला सुलझा लिया जाएगा। सुल्तान ने मना कर दिया जिसके बाद अब्दुलअजीज फोन करने के लिए बाहर निकले और उनके साथ कमरे में मौजूद सऊदी के इस्लामी मामलों के मंत्री शेख सालेह अल-शेख भी कमरे से
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बाहर निकल गए।
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इसके कुछ देर बाद नकाबपोश आदमियों ने कमरे में घुसकर सुल्तान को बुरी तरह पीटा और उनकी गर्दन में सुई घोंप दी। बेहोश सुल्तान को जेनेवा एयरपोर्ट से एक विमान के जरिए कहीं ले जाया गया। इन सभी घटनाओं का जिक्र स्विट्जरलैंड की अदालत में किया गया है।
वहीं, जेनेवा के होटल में सुल्तान के कॉम्युनिकेशन ऑफिसर एडी फरेरा उनके नाश्ते से लौटने का इंतजार कर रहे थे।
सऊदी सरकार के खिलाफ बोल रहे थे सुल्तान
सऊद बिन सैफ अल-नस्र
- फोटो : बीबीसी
फरेरा कहते हैं, 'हम सुरक्षा दल तक नहीं पहुंच पाए थे और यह हमारे लिए पहला अलर्ट था। हमने प्रिंस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिल पाया।'
फरेरा कहते हैं कि, 'दोपहर को स्विटजरलैंड में सऊदी राजदूत होटल के जनरल मैनेजर के साथ आए और उन्होंने कहा कि वे सभी होटल के पेंटहाउस को खाली कर दें और प्रिंस अब रियाद में हैं इसलिए उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है।'
आखिर प्रिंस सुल्तान ने क्या किया था जिसके कारण परिवार को उनका जबरदस्ती अपहरण करना पड़ा? दरअसल, इससे एक साल पहले सुल्तान उपचार के लिए यूरोप पहुंचे थे और उन्होंने आते ही सऊदी सरकार के खिलाफ इंटरव्यू देने शुरू कर दिए। उन्होंने अपने देश के मानवाधिकारों और भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड पर बात की और देश में सुधारों की बात
की थी।
पेरिस भागे थे दूसरे प्रिंस
प्रिंस तुर्की बिन बंदर सऊदी पुलिस के प्रमुखों में से एक थे। साथ ही उन पर शाही परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, लेकिन एक पारिवारिक विवाद के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा और जेल से छूटने के बाद वह पेरिस भाग गए।
2012 में उन्होंने सऊदी अरब में सुधार की आवश्यकता की जरूरतों पर बल देते हुए यूट्यूब पर वीडियो पोस्ट करने शुरू कर दिए। इसके बाद देश के आंतरिक उप-मंत्री अहमद अल-सलेम ने उन्हें वापस बुलाने की कोशिशें कीं, लेकिन उन्होंने देश वापस जाने से मना कर दिया।
इसके बाद प्रिंस तुर्की जुलाई 2015 तक वीडियो पोस्ट करते रहे और फिर अचानक वह गायब हो गए। उनके दोस्त और सामाजिक कार्यकर्ता वेल अल-ख़लफ कहते हैं कि उन्होंने
सऊदी के एक अफसर से सुना था कि तुर्की बिन बंदर उनके साथ थे और उनका अपहरण करके ले जाया गया था।
खलफ कहते हैं कि काफी कोशिशों के बाद उन्हें मोरक्को के एक अखबार में एक आर्टिकल मिला जिसमें यह बताया गया था कि मोरक्को की जेल से सऊदी प्रशासन के अनुरोध पर उन्हें सऊदी निर्वासित कर दिया गया था।
तुर्की बिन बंदर के साथ क्या हुआ यह साफ नहीं हुआ, लेकिन जब वह गायब हुए तब उन्होंने अपने दोस्त वेल को अपनी किताब की एक कॉपी दी थी और साथ ही उन्होंने वेल को कहा था कि जब तक उनकी हत्या न हो जाए, तब तक यह किसी को न दिखाएं। तुर्की को आशंका थी कि उनकी हत्या या अपहरण हो सकता है।
कसीनो के शौकीन थे यह तीसरे प्रिंस
जब प्रिंस तुर्की गायब हुए तभी शाही खानदान से संबंध रखने वाले दूसरे सऊदी प्रिंस सऊद बिन सैफ अल-नस्र भी गायब हुए। वह यूरोप के कसीनो और महंगे होटलों के शौकीन थे।
2014 में सऊद ने सऊदी अरब की राजशाही के खिलाफ ट्वीट करने शुरू किए थे। उन्होंने किंग सलमान को हटाने के लिए तख्तापलट किए जाने को लेकर पत्र लिखे और उन्हें सार्वजनिक किया। यह एक प्रकार से राजद्रोह था। इसके बाद उनके अकाउंट से ट्वीट होने बंद हो गए।
सऊदी राजशाही से मतभेद रखने वाले एक दूसरे प्रिंस खालिद बिन फरहान 2013 में जर्मनी चले गए थे। उनको यकीन है कि सऊद को धोखे से सऊदी की राजधानी रियाद ले जाया गया था।
खालिद कहते हैं कि सऊद बिजनेस डील के लिए मिलान से रोम जा रहे थे, लेकिन उनको ले जाने वाला विमान राजधानी रियाद में उतरा और सऊदी खुफिया विभाग ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया था।
वह कहते हैं कि सऊद भी तुर्की की तरह जेल में हैं और अब उनका भाग्य एक अंडरग्राउंड जेल है। खालिद का आरोप है कि प्रिंस सुल्तान समेत 18 विदेशी नागरिकों का अपहरण किया गया था और उन्हें सऊदी अरब ले जाया गया था।
खालिद जर्मनी में निर्वासित जीवन जी रहे हैं और उनको चिंता है कि उन्हें भी वापस रियाद ले जाया जाएगा। वह कहते हैं, 'यूरोप में परिवार के हम 4 सदस्य थे। हम परिवार और सऊदी अरब में उसके शासन की आलोचना करते थे। हममें से तीन का अपहरण हो चुका है और अब में इकलौता बचा हूं।'