पांच अरब देशों और लीबिया की ओर से कतर की कूटनीतिक घेरेबंदी के लंबा खिंचने से भारत की परेशानी बढ़ गई है। कतर के रक्षात्मक तेवर से भारत को मसले के जल्द सुलझने की उम्मीद थी, लेकिन ईरान, तुर्की और रूस के समर्थन में आने के बाद कतर के बदले तेवर से संकट लंबा खिंचता दिख रहा है।
खासतौर पर शुरुआती खाद्य संकट और अनिश्चितता के कारण वहां कार्यरत 6.5 लाख भारतीय कामगारों की बेचैनी बढ़ गई है। निकट भविष्य में इस संकट के और बढ़ने की आशंका है। हालात को देखते हुए कामगारों ने भारतीय दूतावास से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक संकट फिलहाल बड़ा नहीं है, लेकिन जिस प्रकार रूस, तुर्की और ईरान खुलकर कतर के पक्ष में आए हैं, उससे इस संकट के गहराने के आसार हैं। अरब देशों के बीच इस तरह की स्थितियां पहले भी आती रही हैं और कुछ समय बाद सामान्य होती रही हैं। इसलिए भारत को इस संकट के गहराने का अंदाजा नहीं था।
अब रूस, तुर्की और ईरान का साथ मिलने के बाद कतर के बदले तेवर और इस मुद्दे पर अरब देशों में शुरू हुई कूटनीतिक जंग से नई स्थिति बनती दिख रही है। भारत की चिंता वहां कार्यरत भारतीय कामगारों के अलावा गैस आपूर्ति है। अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो यातायात, आपूर्ति सहित विभिन्न मसलों पर भारत की ओर से शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक पहल की जाएगी। हालांकि इस संकट की शुरुआत में ही इन देशों में स्थित दूतावासों के माध्यम से कूटनीतिक पहल की गई है।