घड़ी मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने मोसाद के साहसिक अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस टीम का मकसद अपने महान जासूस की घड़ी वापस लाना था। घड़ी इस वक्त मोसाद के मुख्यालय में रखी गई है। साथ ही ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इसे जासूस एली के परिवार को सौंपा जाएगा।
एजेंसी की तरफ से अभी तक केवल इतना ही बताया गया है कि घड़ी खोज ली गई है। इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि इसे कहां से किस हालत में ढूंढा गया।
इजरायल को दिलाई थी जीत
एली को इसलिए नेशनल हीरो कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही अरब और इजरायल के संघर्ष में इजरायल को जीत दिलाई थी। मोसाद से जुड़ने के बाद एली अरब चले गए थे। जहां से वह खुफिया जानकारी जुटाते थे। इसी का फायदा लड़ाई में इजरायल को हुआ। उनकी जासूसी की बात साल 1964 में सीरिया को पता चल गई। जिसके बाद 1965 में उन्हें ढूंढकर फांसी दे दी गई।
हालांकि इजरायल ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की थी। इसके लिए उसने अंतरराष्ट्रीय अपील भी की फिर भी वह उन्हें नहीं बचा सका। उनकी मौत के बाद ना तो उनके कपड़ों का कुछ पता चला और ना ही उनके सामान का। केवल उनकी एक फोटो सामने आई जिसमें उन्होंने एक घड़ी पहनी हुई थी तभी से उनकी आखिरी निशानी कही जाने वाली इस घड़ी को तलाशा जा रहा था।