सार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गूगल की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें प्ले स्टोर में बदलाव वाले आदेश पर रोक की मांग की गई थी। अब गूगल को 22 अक्तूबर तक अपने एंड्रॉइड एप स्टोर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और एकाधिकार खत्म करने के उद्देश्य से सुधार करने होंगे। कोर्ट ने इन-एप खरीद पर 15-30% शुल्क को डिजिटल दीवार बताते हुए अरबों के मुनाफे को अनुचित माना।
मच एनडीपीएस एक्ट की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक साल पुराने उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया, जिसके तहत गूगल को अपने एंड्रॉइड एप स्टोर में बड़े बदलाव करने थे। इससे कंपनी को शीघ्र ही प्ले स्टोर में सुधार लागू करना होगा, जो अमेरिका में अधिकांश गैर-एपल स्मार्टफोन के लिए एंड्रॉइड एप्स का प्लेटफॉर्म है।
आदेश का मकसद गूगल के प्ले स्टोर के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और उसे अवैध एकाधिकार से रोकना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि गूगल को 22 अक्तूबर तक अपने प्ले स्टोर में उन एप्स के लिए बदलाव शुरू करना होगा जो उस एंड्रॉइड सॉफ्टवेयर पर चलते हैं।
ये भी पढ़ें:- Argentina: सुप्रीम कोर्ट ने मचाडो को अमेरिका प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया, राष्ट्रपति मिलेई की बढ़ी मुश्किलें
डिजिटल दीवार और मुनाफा
जज जेम्स डोनाटो ने कहा, गूगल द्वारा बनाई गई डिजिटल दीवारों ने कंपनी को अरबों का वार्षिक लाभ दिया। विशेषकर इन-एप लेनदेन पर 15-30% शुल्क लेने की प्रणाली के जरिये गूगल ने अपने एकाधिकार का फायदा उठाया।
कोर्ट से आदेशित मुख्य बदलाव
अमेरिकी जिला जज ने अक्तूबर 2023 में गूगल को प्रतिस्पर्धियों को एप्स तक पहुंच देने के लिए भी बदलाव के आदेश दिए थे। गूगल ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि डोनाटो के आदेश से प्ले स्टोर के 10 करोड़ से अधिक अमेरिकी यूजरों को सुरक्षा जोखिम का सामना करना पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने उसकी नहीं सुनीं।
ये भी पढ़ें:- US-Pakistan: अमेरिका पाकिस्तान को देगा एडवांस मिसाइलें? जानें क्यों चर्चा में है ये बात और क्या है पूरी सच्चाई
गूगल के अन्य कानूनी मोर्चे
प्ले स्टोर बदलावों से गूगल के लाभ पर असर पड़ सकता है, लेकिन कंपनी का मुनाफा डिजिटल विज्ञापन व सर्च इंजन से आता है। वर्ष की शुरुआत में, कोर्ट ने इस मामले में गूगल के संभावित विभाजन प्रस्ताव को खारिज कर राहत दी थी।