विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने थाईलैंड समकक्ष मैरिस सांगियामपोंगसा से मुलाकात की
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थाईलैंड में बिम्सटेक मंत्रीस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया अब आत्मनिर्भरता के दौर में प्रवेश कर रही है और हर क्षेत्र को अपनी जरूरतों का खुद ख्याल रखना होगा। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि अब छोटे सप्लाई चेन और करीबी पड़ोसी देशों का महत्व पहले से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा, 'आज की सच्चाई यह है कि हम आत्मनिर्भरता के युग में प्रवेश कर रहे हैं। खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरकों, टीकों और आपदा प्रबंधन जैसी जरूरतों के लिए हर क्षेत्र को खुद पर भरोसा करना होगा।'
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बता दें कि, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग) की 20वीं मंत्रीस्तरीय बैठक में भाग लेने बैंकॉक पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिम्सटेक सम्मेलन में शामिल होंगे और समुद्री सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
बदलते वैश्विक हालात
विदेश मंत्री ने कहा कि 'दुनिया में बड़ा बदलाव हो रहा है, वैश्विक व्यवस्था अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। अब कुछ गिने-चुने देश ही अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकते।' उन्होंने जोर दिया कि विकासशील देशों को मिलकर एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
भारत के लिए बिम्सटेक का महत्व
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत के 'पूर्व की ओर कार्यनीति', 'पड़ोसी पहले' और 'महासागर' पहल के लिए बिम्सटेक बेहद महत्वपूर्ण है। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के लिए एक प्रमुख संपर्क केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा, 'त्रिपक्षीय राजमार्ग पूरा होने के बाद, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र सीधे प्रशांत महासागर से जुड़ जाएगा। यह एक बड़ा बदलाव लाएगा।'
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'महासागर' नीति – भारत की नई पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च को भारत की नई वैश्विक नीति 'महासागर' की घोषणा की थी। यह नीति 2015 में शुरू की गई 'सागर' नीति का विस्तार है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। विदेश मंत्री ने कहा कि 'बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के साझा हित और चिंताएं हैं, जिनका समाधान मिलकर किया जा सकता है। यदि हम एक साथ प्रयास करें, तो व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अपनी वास्तविक क्षमता को हासिल कर सकते हैं।'