प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जी7 समिट में हिस्सा लेने के लिए बहरीन से फ्रांस के बिआरित्ज शहर के लिए रवाना हो गए हैं। समिट के दौरान उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी हो सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों नेता कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान ट्रंप जम्मू-कश्मीर में तनाव कम करने को लेकर नरेंद्र मोदी का प्लान जानना चाहेंगे। पीएम मोदी अभी बहरीन में हैं।
इससे पहले अमेरिका कई बार जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए अनुच्छेद 370 पर भारत का निर्णय को आंतरिक मामला बता चुका है, लेकिन उसके अनुसार इसके क्षेत्रीय निहितार्थ भी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी क्षेत्रीय तनाव को कम करने और कश्मीर में मानवाधिकारों के लिए सम्मान बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
माना जा रहा है कि इस तीन दिन के जी7 समिट में अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध, ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के मुद्दे, तेहरान के परमाणु प्रोग्राम के चलते अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव और ब्राजील में अमेजन वर्षावन को नष्ट करने वाली आग पर बातचीत हो सकती है।
जी7 और भारत
पहली बार भारत को साल 2003 में जी7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। तब भी यह सम्मेलन फ्रांस में ही आयोजित किया गया था। इस बार फ्रांस के बिआरित्ज में इस सम्मेलन का 45वां संस्करण होने जा रहा है। इस संगठन में भारत पूर्ण सदस्य न होकर विशेष आमंत्रित सदस्य है।
क्या है जी7
जी-7 दुनिया के सात सबसे विकसित और औद्योगिक महाशक्तियों का संगठन है। इसे ग्रुप ऑफ सेवेन (G7) के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें फ्रांस, जर्मनी, यूके, इटली, अमेरिका, कनाडा और जापान शामिल हैं।
1970 के दशक में जब वैश्विक आर्थिक मंदी और तेल संकट बढ़ रहा था, तब फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति बैलेरी जिस्कॉर्ड डी एस्टेइंग ने जी-7 की आधारशिला रखी। 1975 में जी-7 का गठन हुआ। तब इसमें सिर्फ 6 संस्थापक देश थे। कनाडा इसमें शामिल नहीं था।
यह सम्मेलन पहली बार 1975 में ही फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास स्थित शहर रम्बोइले में हुआ था। 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल किया गया। तब जाकर इस समूह का नाम जी7 रखा गया। जी-7 एक अनौपचारिक संगठन है। इसका न तो कोई मुख्यालय है, न ही चार्टर या सचिवालय।