ब्रॉड पीक हिमस्खलन में जान गंवाने वाले नेपाल के दिग्गज पर्वतारोही पुर बहादुर गुरुंग को काठमांडू में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गैर-शेरपा समुदाय के सबसे सफल पर्वतारोहियों में शामिल गुरुंग ने अपने संघर्ष, साहस और उपलब्धियों से पर्वतारोहण की दुनिया में अमिट पहचान बनाई। उनकी जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही पुर बहादुर गुरुंग को शुक्रवार को काठमांडू के स्वयंभूनाथ में राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी गई। 8,047 मीटर ऊंचे पाकिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर हाल में आए भीषण हिमस्खलन में उनकी मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार में नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा और पर्वतारोहण जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
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होटल कर्मचारी से दुनिया के शीर्ष पर्वतारोही बनने तक का सफर
24 दिसंबर 1988 को नेपाल के गोरखा जिले के लापक गांव में जन्मे पुर बहादुर गुरुंग का बचपन हिमालय की गोद में बीता। शुरुआत में उन्होंने मनांग के एक होटल में काम किया। बाद में ट्रेकिंग गाइड बनने का सपना लेकर 2009 में काठमांडू पहुंचे और पोर्टर (कुली) के रूप में करियर शुरू किया। कठिन मेहनत के दम पर उन्होंने 2011 में पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया और इसके बाद लगातार कई बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा नहीं बल्कि नेपाल का झंडा और अपनी उपलब्धियों का परचम लहराया। उन्होंने कुल 10 बार माउंट एवरेस्ट पर सफलता हासिल की।
ब्रॉड पीक अभियान के दौरान हुआ हादसा
पुर बहादुर गुरुंग प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुरजा की 'एलीट एक्सपेड' टीम का हिस्सा थे। जुलाई के अंत में पाकिस्तान के ब्रॉड पीक अभियान के दौरान आए हिमस्खलन में पांच नेपाली पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। गुरुंग का पार्थिव शरीर पाकिस्तान से कतर के रास्ते काठमांडू लाया गया। तिब्बत स्थित शीशापांगमा पर्वत पर चढ़ाई की अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने ब्रॉड पीक अभियान में हिस्सा लिया था।