भारत ने इसको देखते हुए पिछले वर्ष राष्ट्रपति शी की ओर से आयोजित बीआरआई फोरम का बहिष्कार किया। चीन ने इसके साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनने और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत के प्रयास में बाधा उत्पन्न की जिससे दोनों देशों के संबंधों में दरार और बढ़ गई। वर्ष के बड़े हिस्से के दौरान चीन में भारत के राजदूत रहे गौतम बम्बावाले ने कहा, ‘‘2018 एक ऐसा वर्ष था जिस दौरान भारत..चीन संबंध डोकलाम से वुहान और उसके आगे बढ़े।’’ बम्बावाले ने पहले अनौपचारिक सम्मेलन के लिए चीन के अधिकारियों के साथ नजदीकी रूप में संवाद में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
बम्बावाले 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने पीटीआई से एक ईमेल जवाब में कहा, ‘‘ऐसा करने के लिए दोनों देशों और उनके नेतृत्व को आत्मनिरीक्षण करना पड़ा और स्वतंत्र रूप से इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कोई अनौपचारिक शिखर बैठक दोनों नेताओं को रणनीतिक संवाद का एक मौका प्रदान करेगी। वुहान में उनकी बातचीत से संबंधों में सुधार का एक माहौल बना।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक संवाद देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी इस वर्ष चार बार मिले। जिस पर ध्यान नहीं दिया गया वह यह है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के रक्षा मंत्री वेई फंगह ने भी इस वर्ष तीन बार मुलाकात की। हमारे विदेश मंत्रियों ने भी कई बार मुलाकात की। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री की इस वर्ष की भारत यात्रा भी एक महत्वपूर्ण घटना थी।’’
बम्बावाले ने चेंगदू में भारत और चीन के बीच ‘हैंड इन हैंड’ सैन्य अभ्यास बहाली और रक्षा संवाद बहाली का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय सैन्य संबंधों का विकास ‘‘इस वर्ष भारत.चीन संवाद में सबसे महत्वपूर्ण रहा।’’ ‘हैंड इन हैंड’ और रक्षा संवाद दोनों डोकलाम गतिरोध के चलते एक वर्ष के अंतराल पर हुए। दोनों देशों ने गत नवम्बर में 21वें दौर की सीमा वार्ता की जिसमें उन्होंने सीमा मुद्दे के हल के लिए संवाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आह्वान किया।