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तेल-गैस कंपनियों को मिलेगी खुली छूट?: ट्रंप सरकार ने हटाईं मीथेन पर लगी पाबंदियां, जलवायु पर क्या पड़ेगा असर?

Wed, 28 Oct 2026 08:27 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल और गैस कंपनियों के लिए मीथेन उत्सर्जन संबंधी नियमों को खत्म करने का एलान किया है। सरकार इसे ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और खर्च घटाने वाला कदम बता रही है, जबकि पर्यावरण संगठनों ने जलवायु और जनस्वास्थ्य पर इसके संभावित बुरे असर को लेकर चिंता जताई है।

 

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल और गैस कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए मीथेन गैस के उत्सर्जन पर लगाई गई पाबंदियों को खत्म करने का एलान किया है। यह नियम पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में लाया गया था, जिसका मकसद तेल और गैस की ड्रिलिंग के दौरान निकलने वाली मीथेन गैस को कम करना था। ट्रंप का दावा है कि इस फैसले से ऊर्जा कंपनियों और आम लोगों को आर्थिक फायदा होगा। हालांकि, पर्यावरण संगठनों ने इसे जलवायु और लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह बताया है।

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ट्रंप ने गिनाए फैसले के फायदे
टेक्सास में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार बाइडेन के समय लागू किए गए मीथेन उत्सर्जन नियम को खत्म कर रही है। उनके मुताबिक, इस फैसले से उपभोक्ताओं और ऊर्जा कंपनियों के करीब 45 अरब डॉलर बचेंगे। साथ ही, लगभग 21 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध हो सकेगा। यह मात्रा अमेरिका में करीब 10 दिनों की पेट्रोलियम खपत के बराबर है। सरकार का तर्क है कि नियमों में ढील देने से घरेलू तेल उत्पादन बढ़ेगा और ऊर्जा की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।

क्या है मीथेन और क्यों है खतरनाक?
मीथेन एक ग्रीनहाउस गैस है, जो धरती का तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रीनहाउस गैसों से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग में मीथेन का योगदान करीब एक-तिहाई है। यह प्राकृतिक गैस का मुख्य हिस्सा है और कम समय में कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्मी रोक सकती है। तेल और गैस निकालने के दौरान उपकरणों से इसका रिसाव होता है। कई बार कंपनियां अतिरिक्त गैस को बेकार समझकर जला भी देती हैं, जिससे पर्यावरण पर असर पड़ता है।
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छोटे तेल कुओं पर भी नियम होंगे कमजोर
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के प्रमुख ली जेल्डिन ने पिछले महीने ही इन बदलावों की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि सरकार मीथेन रिसाव पर नजर रखने वाले 'सुपर एमिटर प्रोग्राम' को खत्म करेगी। इस कार्यक्रम के तहत तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़ी सुविधाओं में बड़े रिसाव की पहचान कर उन्हें ठीक करना जरूरी था। इसके अलावा, छोटे तेल और गैस कुओं के लिए भी नियमों में ढील दी जाएगी। बाइडेन सरकार के नियमों में पुराने और नए, दोनों तरह के कुओं को शामिल किया गया था।

पर्यावरण संगठनों ने जताई चिंता
पर्यावरण संगठनों का कहना है कि इस फैसले से तेल और गैस कंपनियों को प्रदूषण फैलाने की ज्यादा छूट मिल जाएगी। एनवायर्नमेंटल लॉ एंड पॉलिसी सेंटर के वकील मैक्स लोपेज के मुताबिक, इससे प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर झेलने वाले समुदायों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनका यह भी कहना है कि मीथेन को वातावरण में छोड़ने के बजाय इकट्ठा करके ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बाइडेन सरकार ने बताया था बड़ा आर्थिक फायदा
बाइडेन प्रशासन ने 2024 में मीथेन उत्सर्जन कम करने के लिए अंतिम नियम जारी किया था। अधिकारियों का अनुमान था कि इससे 2038 तक करीब 5.26 करोड़ मीट्रिक टन मीथेन उत्सर्जन रोका जा सकेगा। साथ ही, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे प्रदूषकों में भी कमी आएगी। सरकार ने 2034 तक इस नियम से करीब 98 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ होने का अनुमान लगाया था। इसमें पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान में कमी का हिसाब भी शामिल था।

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ट्रंप सरकार पहले भी बदल चुकी है जलवायु नीतियां
ट्रंप प्रशासन इससे पहले भी बाइडेन सरकार की कई पर्यावरण नीतियों में बदलाव कर चुका है। इनमें वाहनों के ईंधन दक्षता मानकों को कमजोर करना और बिजली संयंत्रों पर उत्सर्जन संबंधी पाबंदियों को हटाने जैसे कदम शामिल हैं। मीथेन उत्सर्जन पर लगने वाला शुल्क भी कांग्रेस ने ट्रंप के कार्यकाल की शुरुआत में रद्द कर दिया था। इस शुल्क के तहत तय सीमा से ज्यादा मीथेन छोड़ने वाली कंपनियों पर प्रति मीट्रिक टन 1,500 डॉलर तक का शुल्क लगाया जाना था। अब मीथेन उत्सर्जन नियमों में ढील देने के फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार इसे ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और खर्च घटाने का कदम बता रही है, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञों को आशंका है कि इससे जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।

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