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क्या है कारोशी?: दक्षिण-पूर्व एशिया में धीरे-धीरे क्यों बढ़ रहा है चार दिन के कार्य-सप्ताह का चलन

Thu, 05 May 2022 05:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो

सार

विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना महामारी और उसके असर की वजह से कर्मचारियों में दफ्तर जाने को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं रह गया है। इसके अलावा गुजरे दशकों में हाड़तोड़ मेहनत करने के बढ़े चलन से भी उनमें असंतोष पैदा हुआ है। इसी कारण जापान में कारोशी शब्द आम चलन में आया...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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पूर्वी एशिया में कंपनियों और सरकारी दफ्तरों में चार दिन का कार्य-सप्ताह शुरू करने की योजना का परीक्षण किया जा रहा है। इसका मकसद कर्मचारियों को थकान पैदा करने वाली कार्य-शैली से मुक्ति देना है। परीक्षण के दौरान देखा जा रहा है कि अगर हफ्ते में चार दिन ही काम करने की रवायत शुरू की गई, तो उसका उत्पादकता पर क्या असर पड़ेगा।

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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में कमरतोड़ मेहनत का वर्क कल्चर रहा है। यहां रोज कार्य-दिवस का काफी लंबा होता है। इसलिए इस योजना में सबसे ज्यादा दिलचस्पी यहीं ली जा रही है। जापानी कंपनी हिताची ने पिछले महीने ये एलान किया था कि वह इसी वित्तीय वर्ष में अपने 15 हजार कर्मचारियों के लिए चार दिन के कार्य-सप्ताह की शुरुआत कर देगी। जापान में वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक होता है। पोकेमॉन जैसे लोकप्रिय गेम के लिए मशहूर गेम डेवलपर कंपनी गेम फ्रीक ने तो अपने कर्मचारियों के एक हिस्से के लिए चार दिन का सप्ताह शुरू भी कर दिया है। खबरों के मुताबिक पेनासोनिक होल्डिंग्स और एनईसी जैसी बड़ी कंपनियां भी इस दिशा में सोच रही हैं।

इंडोनेशिया में भी हुई शुरुआत

वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक कई दूसरे देशों में भी इस दिशा में पहल हुई है, हालांकि वह रफ्तार जापान की तुलना में धीमी है। इंडोनेशिया में वित्तीय क्षेत्र की कंपनी अलामी ने पिछले साल अपने कर्मचारियों के लिए चार दिन का हफ्ता शुरू किया। तब उसने कहा था कि ऐसा कर्मचारियों की मानसिक सेहत में सुधार और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया गया है।

दक्षिण कोरिया में शिक्षा क्षेत्र की कंपनी एडुविल दक्षिण-पूर्वी एशिया में इस दिशा में कदम उठाने वाली पहली कंपनी बनी थी। उसने 2019 में ही ये सिस्टम लागू कर दिया। एडुविल से प्रेरित होकर दक्षिण कोरिया के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में प्रोग्रेसिव जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार सिम सैंग जंग ने वादा किया कि वे जीते, तो पूरे देश में चार दिन का कार्य-सप्ताह लागू कर देंगे। लेकिन वे चुनाव हार गए।

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जापान की बड़ी कंपनी पेरसोल होल्डिंग्स ने अपने कर्मचारियों के बीच इस बारे में एक सर्वे कराया। उसमें 25.5 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे तीन या चार दिन का कार्य सप्ताह पसंद करेंगे। उधर वियतनाम और इंडोनेशिया में भी इस बारे में सर्वे हुए हैं। उनके मुताबिक वियतनाम में 78 फीसदी और इंडोनेशिया में 69 फीसदी कर्मचारियो ने कार्य-सप्ताह घटाने के पक्ष में राय जताई है।

 

काम के बोझ से मौत!

विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना महामारी और उसके असर की वजह से कर्मचारियों में दफ्तर जाने को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं रह गया है। इसके अलावा गुजरे दशकों में हाड़तोड़ मेहनत करने के बढ़े चलन से भी उनमें असंतोष पैदा हुआ है। इसी कारण जापान में कारोशी शब्द आम चलन में आया। इसका अर्थ होता है- काम के बोझ से मौत। जापान में 2021 में कारोशी के बदले मुआवजे के लिए 2,800 से ज्यादा अर्जियां दी गईं।

चीन और कोरिया में सप्ताह में छह दिन 12 घंटे काम करने का चलन रहा है। लेकिन अब उन दोनों देशों में लोग उससे ऊब रहे हैं। इसे देखते हुए सरकारें और कंपनियां भी नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित हुई हैं।

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