फ्रांस, न्यूजीलैंड, सेशेल्स, मलेशिया, स्लोवाकिया, इटली और अब उज्बेकिस्तान किर्गिस्तान... बीते एक वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तूफानी रफ्तार से दुनियाभर के 20 देशों के दौरे किए हैं, उसकी प्रकृति अतीत के कूटनीतिक दौरों से बिल्कुल जुदा है।
ट्रंप की बेतुकी नीतियों ने बनाया आक्रामक
भारत की इस आक्रामक विदेश नीति की वजह कहीं न कहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेतुकी नीतियां ही रही हैं। अमेरिका के अनपेक्षित रुख के बाद भारत ने उस पर निर्भर रहकर जोखिम उठाने के बजाय नए रणनीतिक साझेदार तलाश करना बेहतर समझा।
सबमरीन से लेकर फ्री ट्रेड तक... बड़े सौदों की राह खुली
पीएम मोदी की आर्थिक कूटनीति का ही नतीजा है कि जर्मनी से सबमरीन तकनीक, फ्रांस से एआई वीजा, पार्टनरशिप व स्टूडेंट क दक्षिण कोरिया से शिपबिल्डिंग और यूरोपीय संघ व ब्रिटेन से फ्री ट्रेड समझौते की राह खुली।
कितने बड़े वैश्विक समझौते?