यह परेड शनिवार को आयोजित की गई। इसमें भारत के सभी 28 राज्यों की सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुतियां शामिल थीं। इस परेड में 'इंडिया पवेलियन' भी था, जहां हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ी 'एक जिला-एक उत्पाद' (ओडीओपी) की वस्तुएं प्रदर्शित की गई थीं। सिएटल मं भारत के वाणिज्य दूत प्रकाश गुप्ता, सिएटल के मेयर ब्रूस हैरेल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने हरी झंडी दिखाकर परेड को रवाना किया। इस मौके पर तिरंगे के गुब्बारे आसमान में छोड़े गए, जिससे इस भव्य परेड की शुरुआत हुई। सड़कों पर भारतीय तिरंगे के रंगों की चमक दिखाई दी।
ये भी पढ़ें:
IDF ने नौ देशों के साथ मिलकर गाजा में एयरड्रॉप की मदद; हमास के हथियारबंद लड़ाकों को भी निशाना बनाया
सिएटल में इंडिया डे परेड का आयोजन
- फोटो : एक्स/ब्रूस हैरेल
'इंडिया पवेलियन' इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था, जिसमें 28 राज्यों और कई थीम आधारित प्रदर्शनियों के 30 से अधिक बूथ लगाए गए थे। हर बूथ पर उस राज्य की खास ओडीओपी वस्तुएं रखी गई थीं। साथ ही उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दी गई थी। इस दौरान गणमान्य अतिथियों और मौजूद दर्शकों ने विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद भी चखा और सांस्कृतिक कलाकृतियों को देखा, जिससे भारत की समृद्ध विरासत और परंपराओं की झलक देखने को मिली। भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में दो हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। इस दौरान सिएटल के मेयर हैरेल ने कहा कि अमेरिका को भारत के प्रेम, करुणा और अहिंसा के संदेश से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिएटल एक विविधता से भरा हुआ और तकनीकी उत्कृष्टता वाला शहर है और इसमें भारतीय मूल के अमेरिकियों का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने सिएटल में भारतीय वाणिज्य दूतावास के खुलने को ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि शहर को इस बात पर गर्व है कि उसने पहली बार इंडिया डे परेड की सह-मेजबानी की।
ये भी पढ़ें:
चीन में गूंजी विकसित भारत की गूंज, ग्वांगझू में भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर हुई संगोष्ठी
अमेरिकी सांसद एडम स्मिथ ने कहा अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में शांति और सुरक्षा सबसे जरूरी है और इन उद्देश्यों को हासिल करने में अमेरिका के लिए भारत से अच्छा कोई साझेदार नहीं मिल सकता। इस परेड में भारत के सभी राज्यों से आए हजारों भारतीय मूल के अमेरिकियों ने उत्साह से भाग लिया। उन्होंने रंग-बिरंगी झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने क्षेत्रों की कला, भाषा और परंपराओं को पेश किया और भारत की 'विविधता में एकता' की सच्ची भावना को जीवंत किया।