US: अमेरिकी जज ने ट्रंप प्रशासन को उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो (सीएफपीबी) को बंद करने से रोका। यह एजेंसी उपभोक्ताओं को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनी थी। कोर्ट के अंतिम फैसले तक इसे खत्म नहीं किया जाएगा।
अमेरिका के एक जज ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो (सीएफपीबी) को बंद करने से रोक दिया है। यह एजेंसी उपभोक्ताओं को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाई गई थी। ट्रंप प्रशासन इसे पूरी तरह से बंधन करने की योजना बना रहा था।
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डिस्ट्रिक्ट जज एमी बर्मेन जैक्सन ने शुक्रवार को एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिससे यह एजेंसी तब तक बनी रहेगी, जब तक मुकदमे पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। जज ने कहा कि कोर्ट इस एजेंसी को बंद होने से बचाने के लिए कार्रवाई कर सकती है और उसे कदम उठाना चाहिए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक फरवरी को रोहित चोपड़ा को सीएफपीबी के निदेशक के पद से हटा दिया था। इसके बाद एजेंसी को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई और कर्मचारियों को काम रोकने के आदेश मिले। 10 मार्च को जब इस मामले की कोर्ट में सुनवाई हुई तो मुख्य संचालन अधिकारी एडम मार्टिनेज ने बताया था कि एजेंसी बंद होने की स्थिति में हैं और ट्रंप के आदेश के बाद वहां अफरातफरी मची हुई है।
चोपडा को बर्खास्त करने के बाद उनकी जगह नया अस्थायी निदेशक नियुक्त किया गया, जिन्होंने सभी संचालनों को रोक दिया और सौ मिलियन डॉलर के अनुबंधों को रद्द कर दिया और 70 कर्मचारियों को निकाल दिया।
मार्टिनेज ने बताया कि अब एजेंसी के मौजूदा अधिकारी ज्यादा अनुशासित तरीके से काम कर रहे हैं। पिछले महीने एलन मस्क के सरकारी दक्षता विभाग के प्रतिनिधि जब सीएफपीबी मुख्यालय पहुंचे थे, तब हालात सही नहीं थे। सीएफपीबी उपभोक्ताओं को वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रामक प्रथाओं से बचाने के लिए काम करता है। इसे 2008 की आर्थिक मंदी के बाद अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने बनाया था। यह उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करता है और बैंकों की जांच कर छात्र ऋण लेने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।