ट्रंप ने अमेरिका में भ्रष्टाचार अल्प विकसित (थर्ड वर्ल्ड) देशों के स्तर तक पहुंचने का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई की तुलना वाटरगेट कांड से कर दी। उन्होंने सवाल किया कि इस कार्रवाई और वाटरगेट में क्या अंतर है? यह अभियोजन पक्ष का कदाचरण है और न्याय प्रणाली का शस्त्रीकरण है।
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आलीशान पॉम हाउस और रिजॉर्ट मार-ए-लीगो पर सोमवार देर रात (भारत में मंगलवार तड़के) छापा मारा है। जांच एजेंसी के एजेंट ट्रंप के घर को घेरे हुए हैं और तलाशी ली जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया है, हालांकि एफबीआई ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। ट्रंप का यह निवास फ्लोरिडा में पाम बीच पर स्थित है।
ट्रंप ने अमेरिका में भ्रष्टाचार अल्प विकसित (थर्ड वर्ल्ड) देशों के स्तर तक पहुंचने का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई की तुलना वाटरगेट कांड से कर दी। उन्होंने सवाल किया कि इस कार्रवाई और वाटरगेट में क्या अंतर है? वाटरगेट कांड के वक्त जांच एजेंसियों ने डेमोक्रेट नेशनल कमेटी पर छापेमारी की थी। बता दें, वाटरगेट कांड अमेरिकी इतिहास का बड़ा राजनीतिक स्कैंडल है। यह 1972 से 1974 तक अमेरिकी राष्ट्रपति रहे रिचर्ड निक्सन के कार्यकाल के दौरान हुआ था और इसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
क्या है अमेरिका का चर्चित वाटरगेट कांड
1969 के अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार रिचर्ड निक्सन अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए। उनके कार्यकाल के शुरुआती दो-ढाई साल सब कुछ ठीक चला, लेकिन अंतिम साल में फिर राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी शुरू की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी दल डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी तैयारियों का पता लगाने के लिए सरकार की ताकत का उपयोग किया। इसके तहत उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की नेशनल कमेटी के वाटरगेट कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर की जासूसी शुरू करा दी। जासूसों ने निक्सन की विरोधी पार्टी के दफ्तर में कॉल रिकॉर्डिंग के उपकरण लगा दिए, लेकिन कुछ दिनों बाद ये उपकरण खराब हो गए। इसके बाद 17 जून, 1972 की रात को पांच जासूसों ने फिर से उस दफ्तर में घुसने की कोशिश की, ताकि इन उपकरणों को ठीक किया जा सके। जब वो इन उपकरणों के तारों को जोड़ रहे थे, तभी वहां पुलिस पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अगले दिन अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' में गिरफ्तारी की खबर छपी और पूरा मामले का भंडाफोड़ हुआ। इस जासूसी विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि निक्सन को पद छोड़ना पड़ा।