इंडोनेशिया के बाली में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन पर सारी दुनिया की नजर है। यूक्रेन युद्ध और दुनिया भर में महंगाई के गहराते संकट के बीच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 20 देशों के विदेश मंत्री यहां इकट्ठे हुए हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह पहला मौका है, जब इन देशों के विदेश मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से मिलने का मौका मिलेगा।
राजनयिकों के मुताबिक इस बैठक के दौरान प्रभावशाली देशों के विदेश मंत्रियों को अलग से द्विपक्षीय बातचीत करने का मौका भी मिलेगा। यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर दुनिया दो खेमों में बंटी दिख रही है। अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध का भी ऐसा ही नतीजा सामने आया है। इन हालात के बीच यहां आए विदेश मंत्रियों को स्थिति को काबू में रखने के उपायों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलेगा।
ये घोषणा पहले ही हो चुकी है कि एंटनी ब्लिंकेन यहां चीन के विदेश मंत्री से मिलेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की। लेकिन उन्होंने इस चर्चा का खंडन कर दिया कि ब्लिंकेन यहां रूसी विदेश मंत्री लावरोव से भी मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक इस बैठक में खास ध्यान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी रहेगा। जयशंकर के भी यहां चीनी विदेश मंत्री से मिलने की संभावना है। इसके अलावा वे कई दूसरे विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।