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Pakistan Crisis: शहबाज सरकार ने सैन्य खर्च में कटौती का उठाया जोखिम, दावा- IMF के दबाव में उठाया कदम

Thu, 07 Jul 2022 05:39 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पिछले साल सेना के इस बजट में कटौती के समय ये चर्चा भी हुई थी कि अगले वित्त वर्ष में इस सैन्य खर्च को कम रखा जाएगा, लेकिन वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार ने 363 अरब रुपये का आवंटन कर दिया। अब कटौती के बाद इस मद में 291 अरब रुपये बचे हैं। यह भी पिछले साल हुए असल खर्च से ज्यादा है।
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शाहबाज शरीफ - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान के आर्थिक संकट की फिर सेना पर मार पड़ी है। पाकिस्तान में ऐसा होना असाधारण घटना माना जाता है। गहराते आर्थिक संकट के कारण वहां सशस्त्र सेना विकास कार्यक्रम के बजट में 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। बताया जाता है कि ऐसा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के दबाव में किया गया है। बीते दस जून को पाकिस्तान का अगले वित्त वर्ष का बजट पेश किया गया था। उस रोज इस कार्यक्रम के लिए 363 अरब रुपये का आवंटन किया गया था। अब इसमें 72 अरब रुपये की कटौती कर दी गई है।

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आईएमएफ ने कर्ज की अगली किस्तें देने के लिए पाकिस्तान पर शर्त लगाई है कि वह अपने बजट को सकल घरेलू उत्पाद के 0.2 प्रतिशत बचत में ले आए। यानी बजट में 153 अरब रुपये का फायदा दिखना चाहिए। उसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने ये कदम उठाया है। पाकिस्तान में सेना की हैसियत को देखते हुए यह एक जोखिम भरा कदम भी है, लेकिन आर्थिक मजबूरियों के कारण वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल को ऐसा करने की घोषणा करनी पड़ी है। 

पाकिस्तान सरकार को आशा है कि इस खबर से वह एक मजबूत संदेश देने में सफल होगी। सैन्य खर्च में कटौती से आईएमएफ को यह संदेश मिलेगा कि पाकिस्तान सरकार खर्च घटाने को लेकर सचमुच गंभीर है। वित्त मंत्री इस्माइल को आशा है कि अब इसी हफ्ते आईएमएफ के साथ कर्ज पाने का करार हो जाएगा। 
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यह एक साल के अंदर दूसरा मौका है, जब सशस्त्र बल विकास कार्यक्रम का बजट घटाया गया है। पिछले वित्त वर्ष में तत्कालीन इमरान खान सरकार ने भी आईएमएफ के दबाव में ऐसा कदम उठाया था। पिछले साल के बजट में इस कार्यक्रम के लिए 340 अरब रुपये का आवंटन किया गया था, लेकिन वास्तविक खर्च को घटा कर 270 अरब रुपये कर दिया गया। ऐसी चर्चा रही है कि पूर्व इमरान खान सरकार के इस कदम से सेना में नाराजगी पैदा हुई थी।

पिछले साल सेना के इस बजट में कटौती के समय ये चर्चा भी हुई थी कि अगले वित्त वर्ष में इस सैन्य खर्च को कम रखा जाएगा, लेकिन वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार ने 363 अरब रुपये का आवंटन कर दिया। अब कटौती के बाद इस मद में 291 अरब रुपये बचे हैं। यह भी पिछले साल हुए असल खर्च से ज्यादा है।

सशस्त्र सेना विकास कार्यक्रम आम सैन्य बजट से अलग होता है। इसलिए पाकिस्तान सरकार का दावा है कि बजट में इस कटौती से पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों पर निकट भविष्य में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा कि सरकार के कुल बजट को संतुलित करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है। मकसद यह है कि आईएमएफ ने खर्च कटौती के लिए जो लक्ष्य बताया है, सरकार उसे हासिल कर सके। 

अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि संघीय सरकार के खर्च घटाने के कदमों से अब संघीय बजट में 153 अरब रुपये का मुनाफा दिख रहा है, लेकिन प्रांतीय सरकारों ने ऐसे कदम नहीं उठाए हैं, जिनसे उनके बजट में 750 अरब रुपये की बचत दिखे। इसलिए अभी यह कहना कठिन है कि आईएमएफ को संतुष्ट करने लायक कदम सचमुच उठा लिए गए हैं।

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