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Israel New Army Chief: इयाल जमीर के इस्राइली सेना प्रमुख बनने पर लगी मुहर, 40 साल से अधिक अनुभव; जानिए सबकुछ

Mon, 17 Feb 2025 07:31 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव

सार

इस्राइल-हमास के बीच युद्ध विराम समझौता चल रहा है। दोनों देशों ने एक दूसरे पर कई बार समझौता के उल्लंघन का आरोप भी लगाया। इसी बीच इस्राइली सरकार ने रक्षा बलों के अगले स्टाफ औफ चीप की नियुक्ति की घोषणा कर दी। तो आईए जानते है कौन होंगे आईडीएफ के अगले चीफ औफ स्टाफ? 
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इयाल जमीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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15 महीनों के भीषण संघर्ष के बाद इन दिनों इस्राइल-हमास के बीच युद्ध विराम समझौता चल रहा है। इसी बीच इस्राइली सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। इसके तहत प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस्राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) के नए चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में इयाल जमीर को नियुक्त करने का फैसला किया है। जमीर लेफ्टिनेंट जनरल हर्जी हलेवी की जगह लेंगे, जिन्होंने 7 अक्टूबर को सेना की विफलताओं के कारण इस्तीफा देने का ऐलान किया था। हलेवी 5 मार्च को अपना पद छोड़ेंगे।
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बता दें कि आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ तीन साल के लिए काम करता है, जिसमें एक साल का विस्तार भी संभव है। अपने कार्यकाल के अंत से पहले पद छोड़ने वाले आखिरी बार चीफ ऑफ़ स्टाफ़ लेफ्टिनेंट-जनरल डैन हलुट्ज़ थे, जिन्होंने 2006 के दूसरे लेबनान युद्ध के दौरान आईडीएफ की विफलताओं के कारण 2007 में इस्तीफा दे दिया था।
 
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इयाल जमीर - फोटो : अमर उजाला
कौन है इयाल जमीर, एक नजर
अब अगर इयाल जमीर की करें तो, 59 वर्षीय जमीर का जन्म ईलाट में हुआ था। उन्होंने 1984 में सेना में भर्ती होकर टैंक कमांडर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और धीरे-धीरे ऊंचे पदों तक पहुंचे। 2012-2015 तक वह नेतन्याहू के सैन्य सचिव रहे और 2018-2021 तक डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ रहे। 2023 में उन्हें रक्षा मंत्रालय का महानिदेशक नियुक्त किया गया। वहीं शुरूआती शिक्षा की बात करें ते जमीर की शिक्षा तेल अवीव और हाइफ़ा विश्वविद्यालय से है और वे व्हार्टन विश्वविद्यालय के सामान्य प्रबंधन कार्यक्रम के स्नातक भी हैं।

देश में जांच आयोग गठित करने की मांग तेज
इस बीच, इस्राइली सरकार द्वारा राजनीतिक और सैन्य विफलताओं की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग तेज हो गई है। इस आयोग के पास गवाहों को बुलाने और सबूत इकट्ठा करने का अधिकार होगा, और यह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायधीशों द्वारा नेतृत्व किया जाएगा। हालांकि मामले में पीएम नेतन्याहू और उनकी सरकार का कहना है कि युद्ध के बाद ही स्वतंत्र आयोग नियुक्त किया जाना चाहिए।
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