फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sagarmatha Sambaad: नेपाल में बोले विशेषज्ञ- पहाड़ मानवता की जीवन-रेखा, इनका संरक्षण विश्व समुदाय का कर्तव्य

Sun, 18 May 2025 04:17 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

सागरमाथा संवाद के दूसरे दिन शनिवार को विशेषज्ञों ने एक पैनल चर्चा में भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि पहाड़ मानवता की जीवन रेखा हैं, इसलिए इनका संरक्षण करना पूरे विश्व समुदाय का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पहाड़ पृथ्वी के 22 फीसदी क्षेत्र में फैले हुए हैं और ये दुनिया की लगभग 50 फीसदी आबादी की आजीविका का सहारा हैं। 
विज्ञापन
सागरमाथा संवाद के दौरान विशेषज्ञ - फोटो : X@S_Sambaad
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित तीन दिवसीय सागरमाथा संवाद में शनिवार को विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहाड़ मानवता की जीवन रेखा हैं। इसलिए, पहाड़ों का संरक्षण करना पूरे विश्व समुदाय का कर्तव्य है। 

विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय संवाद के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने 'पहाड़ों में प्रकृति, संस्कृति और रोमांच की खोज' विषय पर एक पैनल चर्चा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहाड़ों की पारिस्थितिकी का संरक्षण पर्यावरण के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमालय को संरक्षित करने के साथ ही संस्कृति, जीवन सैली, वन्यजीवन और जैव विविधता को भी बचाना होगा, ताकि पर्यटन और स्थानीय लोगों का जीवन बना रहे। 

पैनल चर्चा में इन विशेषज्ञों ने लिया भाग
पैनल चर्चा में भाग लेने वालों में विश्व वन्यजीव कोष, नेपाल के कंट्री डायरेक्टर घनश्याम गुरुंग, ऑक्सफैम के रिवर बेसिन मैनेजर राजन सुबेदी, युगांडा के जल एवं वन मंत्रालय के डिप्टी कमिश्नर मौरिन एनिनो, एवरेस्ट प्रदूषण नियंत्रण समिति के सीईओ छिरिंग शेरपा और प्रमुख पर्यावरणविद् अनिल चित्रकार शामिल थे।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Climate: 'भारत की गलती नहीं फिर भी पूरी तत्परता से जलवायु कार्रवाई कर रहा', केंद्रीय पर्यावरण मंत्री का बयान

पृथ्वी के 22 फीसदी क्षेत्र में फैले पहाड़
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ पृथ्वी के 22 फीसदी क्षेत्र में फैले हुए हैं। पर्वतीय क्षेत्र दुनिया की लगभग 50 फीसदी आबादी की आजीविका का सहारा हैं। उन्होंने कहा कि हिंदु कुश हिमालय क्षेत्र की अपनी अभूतपूर्व विविध संस्कृति है। यहां की भाषा, धर्म, जातीयता और पारंपरिक ज्ञान दुनिया से 70 मिलियन (सात करोड़) से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता है। विशेषज्ञों ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए नई तकनीकों और निवेश की जरूरत है, ताकि यहां रहने वाले लोगों का भविष्य सुरक्षित हो सके। 

जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव का सामना कर रहे SKH के लोग: ठाकुरी
सागरमाथा संवाद के तहत एक अलग चर्चा में बोलते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री ऐन बहादुर शाही ठाकुरी ने कहा कि हिंदू कुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र के निवासी जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं, हालांकि कार्बन उत्सर्जन में उनका योगदान नगण्य है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान में वृद्धि वैश्विक औसत से अपेक्षाकृत अधिक है और यह वृद्धि  पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन दोनों पर भारी पड़ रही है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया में भूकंप, रिक्टर पैमाने पर 4.6 मापी गई तीव्रता; फिलहाल नुकसान की खबर नहीं

जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रहे पहाड़
ठाकुरी ने जलवायु परिवर्तन के प्रति पहाड़ों की संवेदनशीलता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पहाड़ जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियर झीलें फट रही हैं, सूखा पड़ रहा है, भूस्खलना हो रहा है और बारिश का पैटर्न भी बदल गया है। उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई को सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि नदियां, ग्लेशियर और पारिस्थितिकी तंत्र किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं हैं। 

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें