कोरोना वैक्सीन के अनुदान के मामले में यूरोपियन यूनियन (ईयू) चीन और अमेरिका से काफी पिछड़ गया है। ये बात ईयू के एक अंदरूनी दस्तावेज में स्वीकार की गई है। वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू के मुताबिक उसने इस दस्तावेज का अध्ययन किया है।
दस्तावेज में बताया गया है कि ईयू ने अब तक कोविड-19 वैक्सीन के 79 लाख डोज को अनुदान के रूप में दिया है। जबकि ईयू देशों ने 20 करोड़ डोज का अनुदान देने की घोषणा की थी। इसका मतलब हुआ कि अभी तक अपने लक्ष्य की तुलना में सिर्फ चार फीसदी का अनुदान ईयू दे पाया है। दूसरी तरफ अमेरिका ने अब तक पांच करोड़ 98 लाख डोज अनुदान के रूप में दिए हैं। चीन दो करोड़ 42 लाख डोज का अनुदान दे चुका है। वेबसाइट पॉलिटिको के मुताबिक ये आंकड़े यूरोपियन यूनियन के उस दस्तावेज में शामिल हैं, जिस पर दो अगस्त की तारीख पड़ी हुई है।
पिछले शुक्रवार को ईयू के विदेश नीति संबंधी प्रमुख जोसेप बॉरेल ने कहा था कि ईयू अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों को वैक्सीन के मामले में नाकाफी सहायता ही दे पाया है। उन्होंने आशंका जताई थी कि इस वजह से उन इलाकों में ईयू अपना प्रभाव चीन के हाथों खो देगा। उन्होंने कहा था- ‘अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में चीन के प्रभाव विस्तार से हमें चिंतित होना चाहिए। हमें वहां अपना ज्यादा प्रभाव कायम करना चाहिए।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये बयान इस बात का संकेत है कि ईयू वैक्सीन कूटनीति के महत्व से परिचित है। ईयू की हाल की बैठकों में ऐसे कई प्रेजेंटेशन हुए, जिनमें यह बताया गया कि दुनियाभर में वैक्सीन के वितरण के मामले में चीन, रूस, अमेरिका और ईयू कहां खड़े हैं। वेबसाइट पॉलिटिको के मुताबिक ईयू के ताजा दस्तावेज में वैक्सीन खरीद के सौदों और अनुदान का ब्योरा है। उसमें ये बात साफ-साफ बताई गई है कि दुनिया के कौन से इलाके ईयू के लिए रणनीतिक रूप से सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
दस्तावेज में विस्तार से बताया गया है कि उत्तरी अफ्रीका, टर्की और बाल्कन देशों को ईयू ने कितनी वैक्सीन दी हैं। यह भी बताया गया है कि उन क्षेत्रों में अब तक आबादी के कितने हिस्से का टीकाकरण हुआ है। साथ ही इस बात का ब्योरा भी है कि ईयू ने उन वैक्सीन की खरीद किस कंपनी से की।
इस दस्तावेज से सामने आया है कि जहां तक व्यापारिक आधार पर निर्यात का सवाल है, तो उसमें ईयू का रिकॉर्ड मजबूत है। उसने 51 देशों को 50 करोड़ 30 लाख वैक्सीन डोज का निर्यात किया है। लेकिन ये ज्यादातर निर्यात धनी देशों को हुआ है। दस्तावेज में बताया गया है कि रूस अपने वैक्सीन स्पूतनिक के लिए मिले ऑर्डर को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उसे 65 देशों से 90 करोड़ से ज्यादा डोज के लिए ऑर्डर मिल चुके हैँ। लेकिन वह सिर्फ तीन करोड़ डोज की सप्लाई ही कर पाया है। इसके अलावा उसने 13 देशों को लगभग साढ़े तीन करोड़ डोज अनुदान के रूप में दिए हैँ।
दस्तावेज के मुताबिक चीन का रिकॉर्ड इस मामले में अच्छा है। उसे एक अरब डोज की के ऑर्डर मिले हैं, जिनमें से वह 94 देशों को 39 करोड़ डोज की सप्लाई कर चुका है। इसके अलावा उसने दो करोड़ 42 लाख डोज अनुदान के रूप में दिए हैं।