यूरोपियन यूनियन ने वैक्सीन पासपोर्ट के वैश्विक मानदंड को तय करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरुसुला वॉन डेर लियेन ने एक आदेश पर दस्तखत किए, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका में जिन लोगों ने कोरोना वायरस की रोकथाम का टीका लगवा लिया है, उन्हें इस साल गर्मियों में यूरोप आने की इजाजत दी जाएगी। जानकारों के मुताबिक इस आदेश का ये साफ मतलब है कि अब जल्द ही वैसे नियम और मानदंड घोषित किए जाएंगे, जिनके तहत यूरोप आने वाले अमेरिकी साबित कर पाएंगे कि उन्होंने टीका ले लिया है।
दुनिया में यात्राएं शुरू हो सकें, इसके लिए ऐसे मानदंड तय करने की जरूरत पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है। अभी तक इस बारे में कोई मानक तय नहीं है। इसीलिए यूरोप में हुई पहल ने दुनिया का ध्यान खींचा है। इससे एक ऐसा सिस्टम सामने आने की उम्मीद बंधी है, जिससे दुनिया के दूसरे देश भी अपने यहां मानक लागू कर सकेंगे। जानकारों के मुताबिक ऐसे सिस्टम की जरूरत है, जिससे टीकाकरण की वास्तविक पुष्टि हो सके और साथ ही जिसमें फर्जीवाड़ा संभव ना हो।
अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक यूरोपीय वैक्सीन पासपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में यूरोपीय अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों की सहायता ले रहे हैं। इसलिए उम्मीद की गई है कि यूरोप जो सिस्टम लागू करेगा, अमेरिका भी अपने यहां उससे मिलता-जुलता सिस्टम लागू कर देगा। मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिका और यूरोप के बीच बनाए जा रहे सिस्टम में अमेरिका के सीडीसी (रोग नियंत्रण एवं निवारण केंद्र) के वैक्सीन लगवाने के प्रमाणपत्र को मान्यता दी जाएगी। इसके अलावा ऐसा क्यूआर कोड भी बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे स्कैन कर पुष्टि की जा सकेगी कि आने वाले व्यक्ति ने टीका लगवाया है या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि विभिन्न देश टीका लगवाने के साथ जो सर्टिफिकेट जारी करते हैं, उससे संबंधित जानकारियां पासपोर्ट पर मौजूद चिप से जोड़ी जा सकती हैं। उस स्थिति में पासपोर्ट चिप को स्कैन करते ही यह भी पता लग जाएगा कि व्यक्ति ने टीका लगवा लिया है या नहीं। बताया जाता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन एस्तोनिया के साथ मिल कर ऐसा सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
जानकारों के मुताबिक असल चुनौती ऐसा मानक तैयार करने की है, जिसे दुनिया के सभी देश मानें। खासकर आशंका जताई गई है कि दूसरी जगहों पर तैयार मानकों या कुछ देशों के सर्टिफिकेट्स को मानने से अमेरिका इनकार कर सकता है। फिर एक समस्या यह भी है कि अलग-अलग देशों में जो सर्टिफिकेट दिया जा रहा है, उनका खाका एक जैसा नहीं है। इसलिए उनका मेल किसी एक क्यूआर कोड से करने में मुश्किल आ सकती है। इन दिक्कतों के बावजूद अगर यूरोप वैक्सीन पासपोर्ट की रूपरेखा तैयार कर पाया, तो उससे दुनिया में निर्बाध यात्राओं का रास्ता एक बार फिर खुल सकेगा। खासकर दुनिया भर के कारोबारी ऐसे पासपोर्ट की जरूरत गहराई से महसूस कर रहे हैं। उनके खुली यात्राएं ना पाने का असर उनके कारोबार पर पड़ा है।
अमेरिका में फिलहाल ऐसा वैक्सीन पासपोर्ट तैयार करने की जरूरत बताई जा रही है, जिससे देश के अंदर सभी 50 राज्यों में आवाजाही आसान हो सके। देश के कई राज्यों ने दूसरे राज्य के लोगों के अपने यहां आने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। प्राइवेट सेक्टर और कुछ राज्यों ने वैक्सीन पासपोर्ट तैयार करने की पहल की है। जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर लॉरेंस गॉस्टिन ने एक अमेरिकी वेबसाइट से कहा कि वैक्सिन पासपोर्ट तैयार करना आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए जरूरी हो गया है। लेकिन उन्होंने कहा- ‘जब तक राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक दिशा निर्देश और तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती, पूरे देश में विश्वसनीय पुष्टि करने योग्य व्यवस्था नहीं बन पाएगी।’