क्या आपको मालूम है कि ब्रिटेन के लोग सबसे ज्यादा कौन सा शब्द बोलते हैं? जवाब सुनेंगे तो चौंक जाएंगे। आम ब्रिटेन के नागरिक सबसे ज्यादा 'सॉरी' शब्द का इस्तेमाल करते हैं! कभी वो आपसे खराब मौसम के लिए माफी मांगेंगे तो कभी कोई और उनसे टकरा गया तो भी कहेंगे, 'सॉरी।' कहते हैं कि ब्रितानी नागरिक घंटे में औसतन एक-दो बार सॉरी बोल ही देते हैं।
हाल ही में एक हजार ब्रिटेन नागरिकों पर एक सर्वे हुआ। पता चला कि हर अंग्रेज़ दिन में कम से कम आठ बार माफी मांगता है। वहीं करीब बारह फीसद ऐसे हैं जो दिन भर में बीस बार सॉरी बोलते हैं। इसी से आपको अंदाजा हो गया होगा कि सॉरी शब्द का ब्रिटिश समाज में किस कदर चलन है।
ब्रिटेन की इस आदत के बारे में वहां के लेखक हेनरी हिचिंग्स ने बेहद दिलचस्प टिप्पणी की है। वो कहते हैं कि अंग्रेज अक्सर ऐसी गलतियों के लिए माफी मांगने को तैयार रहते हैं जो उन्होंने की ही नहीं। उन्हें उस गलती के लिए सॉरी कहने में दिक्कत होती है, जो उन्होंने वाकई में की होती है।
सवाल ये है कि क्या वाकई ब्रिटेन के लोग, बाकी दुनिया के लोगों के मुकाबले ज्यादा माफी मांगते हैं? अगर सच में ऐसा है तो आखिर इसकी वजह क्या है? क्या ये अच्छी बात है? या फिर बुरी आदत है? पता लगाने की कोशिश करते हैं। आदतन सॉरी कहते हैं अंग्रेज?
देशों के मुकाबले ज्यादा बार माफी मांगते
आम तौर पर माना जाता है कि ब्रिटेन और कनाडा के लोग, अमेरिका के मुकाबले ज्यादा सॉरी बोलते हैं। मगर, वो दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा बार माफी मांगते हैं, इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है।
अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक करीना शुमन ने इस बारे में काफी काम किया है। वो कहती हैं कि अलग-अलग देशों में कैसा चलन है? लोग किस बात पर माफी मांगते हैं? अंग्रेजों से ज्यादा बार सॉरी कहते हैं या फिर कम। इसके सबूत जुटा पाना बेहद मुश्किल है।
एक तरीका ये हो सकता है कि आप लोगों को कोई सिचुएशन बताएं और फिर पूछें कि ऐसी हालत में आप क्या कहेंगे? ऐसा ही एक सर्वे हुआ 'यूगव पॉल' का। इसमें 1600 ब्रिटिश और एक हजार अमेरिकियों की राय मांगी गई। सर्वे के मुताबिक हर दस अमेरिकी के मुकाबले पंद्रह ब्रिटिश सॉरी कहने को तैयार थे।
यानी अमेरिकियों के मुकाबले ब्रिटेन में पचास फीसदी ज्यादा बार माफी मांगते हैं। मगर, इसी सर्वे में ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिकों में कई समानताएं भी देखने को मिलीं। दोनों ही देशों के तीन चौथाई लोग, किसी के काम में दखल देनेप पर सॉरी कहने को राजी दिखे। इसी तरह किसी मीटिंग के लिए देर से पहुंचने पर जहां 84 फीसदी अंग्रेज माफी मांगने को तैयार थे, वहीं केवल 74 फीसदी अमेरिकी इसके लिए सॉरी कहने को राजी थे।
ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों पर हुए 'यूगव सर्वे'
हालांकि, किसी काल्पनिक हालत में लोग क्या करेंगे और असल जिंदगी में क्या करते हैं, इसमें बहुत फर्क होता है। ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों पर हुए 'यूगव सर्वे' को ही लें।
किसी और के फूहड़पने के लिए जहां 36 फीसदी अंग्रेज माफी मांगने को राजी थे, वहीं केवल 24 फीसदी अमेरिका के लोगों ने ऐसा करने पर हामी भरी। इस बारे में मशहूर ब्रिटेन सोशल एंथ्रोपोलॉजिस्ट केट फॉक्स ने बड़ा दिलचस्प प्रयोग किया।
उन्होंने इसे अपनी किताब 'वाचिंग द इंग्लिश' में बयां किया है। केट, इंग्लैंड के अलग-अलग शहरों, कस्बों और गांवों में गईं। वो लोगों से जान-बूझकर टकराती थीं और फिर उनकी प्रतिक्रिया नोट करती थीं।
उन्होंने विदेश गए अपने साथियों से भी ऐसा तजुर्बा करने को कहा। केट के इस प्रयोग के दिलचस्प नतीजे आए। वो बताती हैं कि करीब अस्सी फीसदी मामलों में अंग्रेजों ने केट की गलती होने के बावजूद, सॉरी बोला।
अगर किसी और देश के लोग संकोच नहीं करते तो वो हैं जापानी
अक्सर, ब्रितानियों ने सॉरी ऐसे बोला जैसे, बुदबुदा रहे हों, जिसे सुन पाना कई बार मुश्किल भी लगा. यानी ब्रिटिश, आदतन सॉरी बोल देते हैं, जबकि कई बार उनकी गलती नहीं होती। अंग्रेजों के मुकाबले में सॉरी कहने में अगर किसी और देश के लोग संकोच नहीं करते तो वो हैं जापानी ऐसा केट अपनी किताब में लिखती हैं।
अंग्रेजी के सॉरी शब्द की उत्पत्ति, पुरानी इंग्लिश भाषा के शब्द सेरिग से हुई है। सेरिग का मतलब है दुख या तकलीफ में डूबा हुआ इंसान। जबान के मशहूर अमेरिकी एक्सपर्ट, एडविन बैटीस्टेला कहते हैं कि हम सॉरी शब्द का इस्तेमाल कई तरह से, कई मक़सद से करते हैं।
एडविन के मुताबिक, अंग्रेज सॉरी ज्यादा भले बोलते हैं। मगर, हर बार उन्हें अफसोस होता हो ये जरूरी नहीं। एडविन कहते हैं कि कई बार लोग हमदर्दी जताने के लिए भी सॉरी कह देते हैं। शायद अंग्रेज और कनाडाई, ज्यादातर इसी इरादे से सॉरी बोलते हों। मगर, इसका मतलब ये नहीं कि हर बार वो माफी मांग रहे होते हैं।
लोग दूसरे के प्रति इज्जत को काफी तरजीह देते
इस बारे में कुछ और जानकार ये भी कहते हैं कि कई बार लोग, अपनी बेहतर सामाजिक हैसियत के लिए भी माफी मांगते नज़र आते हैं। ब्रिटेन समाज में लोग दूसरे के प्रति इज्जत को काफी तरजीह देते हैं।
साथ ही, वो दूसरे के पर्सनल स्पेस में दखल देना भी पसंद नहीं करते। इसीलिए दूसरे से बात करते वक्त वो सोचते हैं कि दूसरे के काम में अड़ंगा लग रहा है और इसके लिए वो पहले ही माफी मांग लेते हैं। वहीं, अमेरीकी, खुले दिमाग के होते हैं। बिंदास होते हैं। शिष्टाचार के बजाय दोस्त बनाने में ज्यादा यकीन रखते हैं। इसीलिए, कई बार जब अंग्रेज, सॉरी कहते हैं तो अमेरिकियों या कुछ और लोगों को अटपटा लगता है।
किसी अनजान से कोई जानकारी लेने से पहले या फिर उसके पास बैठने के लिए अंग्रेज अक्सर सॉरी कहते हैं। उन्हें लगता है कि बिना एडवांस में माफी मांगे वैसा करना, किसी की निजता में दखल होगा। जो उनके समाज के हिसाब से बहुत खराब बात है। फॉक्स कहती हैं कि अंग्रेज़ों ने सॉरी का बेजा इस्तेमाल कर इसकी अहमियत घटा दी है। हालांकि वो ये भी कहती हैं कि बार-बार सॉरी कहना इतना भी बुरा नहीं, खास तौर से ब्रिटिश समाज के लिए। वो कहती हैं कि दुनिया में बहुत से शब्दों का ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल होता है। मगर, 'सॉरी' इनमें से एक बिल्कुल नहीं।
'सॉरी बोलकर किसी को दोस्त बना सकते हैं'
वैसे, सॉरी कह देने से कई फ़ायदे भी होते हैं. मसलन, बिना अपनी ग़लती के किसी बात के लिए माफ़ी मांगकर आप किसी का भरोसा जीत सकते हैं. ख़राब मौसम के लिए सॉरी बोलकर किसी को दोस्त बना सकते हैं।
हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल की प्रोफ़ेसर एलिसन वुड ब्रुक्स ने इस बारे में बड़े मज़े का तजुर्बा किया है। ब्रुक्स और उनके साथियों ने एक कलाकार को अपने मिशन में शामिल किया. इस कलाकार से कहा गया कि वो बारिश के दिनों में अमरीकी रेलवे स्टेशन पर जाए और लोगों से उनके मोबाइल फ़ोन मांगे, इस्तेमाल के लिए. जब इस कलाकार ने लोगों से मौसम के बारे में सॉरी कहते हुए फ़ोन मांगा तो 47 फ़ीसद ने अपने फ़ोन उसे दे दिए।
वहीं जब इस कलाकार ने लोगों से सीधे-सीधे जाकर पूछा कि आप मुझे अपना फ़ोन दे सकते हैं क्या, तो केवल नौ फ़ीसद लोगों ने हां में जवाब दिया। मतलब साफ़ है कि अगर आप किसी अनजान से सॉरी कहते हुए बात शुरू करते हैं तो आपके दोस्ताना रवैये, विनम्रता का उसे एहसास होता है. वुड ब्रुक्स कहती हैं कि ख़राब मौसम के लिए माफ़ी मांगकर, आप सामने वाले से हमदर्दी जताते हैं, उसका भरोसा जीत लेते हैं।
महिलाएं, मर्दों के मुकाबले ज्यादा बार सॉरी बोलती
अंग्रेज़ों के अलावा महिलाओं के बारे में भी माना जाता है कि वो सॉरी शब्द का ज़्यादा इस्तेमाल करती हैं. अमरीकी मनोवैज्ञानिक करीना शुमन ने इस बारे में एक रिसर्च की थी। उन्होंने यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को अपने बारह दिनों के तजुर्बे नोट करने को कहा. शुमन ने ये पाया कि वाक़ई, महिलाएं, मर्दों के मुक़ाबले ज़्यादा बार सॉरी बोलती हैं।
मगर छात्रों ने ये भी महसूस किया कि उन्हें महिलाओं के सॉरी कहने की ज़रूरत महसूस भी हुई. कई बार उनकी ग़लतियों की वजह से, और कई बार जब वो दूसरों की ग़लती का शिकार हुईं।
अब इस हिसाब से तो, मर्द हों या महिलाएं, दोनों ही औसतन बराबर ही सॉरी बोलते हैं। यानी ये कहना कि महिलाएं ज़्यादा सॉरी बोलती हैं, ग़लत है. इसी तरह ये सोचना कि मर्द माफ़ी मांगने में संकोच करते हैं, ग़लत है। उन्हें माफ़ी मांगने की वजह ही कम नज़र आती है।
क्या माफ़ी मांगना कमज़ोरी की निशानी है? अब, अगर लोगों को माफ़ी मांगने की वजह कम नज़र आती है. तो क्या, वो ये मानते हैं कि सॉरी बोलना उनकी कमज़ोरी की निशानी है? क्या अपने ग़रूर को ताक पर रखकर माफ़ी मांग लेने से कोई छोटा हो जाता है? हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल की प्रोफ़ेसर एलिसन वुड ब्रुक्स इस बात को समझाती हैं।
माफी मांगकर किसी का भरोसा जीतने में कामयाब हो सकते
वो कहती हैं कि अक्सर लोग सॉरी कहने को अपनी ख़ुद्दारी से जोड़ लेते हैं। सोचते हैं कि बेवजह माफ़ी मांगने से ग़लती उनकी मानी जाएगी. इसीलिए लोग सॉरी कहने से कतराते हैं। मगर, ब्रुक्स कहती हैं कि ईमानदारी से माफ़ी मांग लेने से सामने वाले को बेहतर महसूस होता है उसकी भावनाओं को लगी चोट पर मरहम लग जाता है।
सच्चे दिल से माफ़ी मांगकर आप किसी का भरोसा जीतने में कामयाब हो सकते हैं। तो, सवाल ये है कि माफ़ी कैसे मांगी जाए. ज़बान के अमरीकी एक्सपर्ट एडविन बैटीस्टेला इसका बहुत आसान नुस्ख़ा सुझाते हैं. वो कहते हैं कि बचपन में जैसे आपकी मां ने लोगों से माफ़ी मांगना सिखाया था, वैसे ही दूसरों से माफ़ी मांगो। जैसे कि, आप किसी के ऊपर पत्थर फेंकते थे, तो आपको कहा जाता था कि जाओ, उससे कहो कि तुमने पत्थर मारकर ग़लती की है. आइंदा से ऐसा नहीं करोगे।
इस तरह से सॉरी कहने का साफ़ सा मक़सद है. सामने वाले को पता चलना चाहिए कि आप अपनी किस ग़लती के लिए, किस बर्ताव के लिए माफ़ी मांग रहे हैं। अब सवाल ये कि आख़िर कितनी बार सॉरी कहा जाए? तो जनाब, सिर्फ़ एक बार सॉरी कहना काफ़ी है, छोटी-मोटी बात के लिए। अगर आपकी नज़र में आपने बड़ी ग़लती की है तो आप दो बार सॉरी कह सकते हैं. इससे ही आपने दिल में जो अफ़सोस महसूस किया है, वो सामने वाले पर ज़ाहिर हो जाएग। आप उसका भरोसा फिर से जीत लेंगे।
मगर, अंग्रेज़ों की बात हो तो उनके लिए इससे भी दोगुनी बार सॉरी कहना होगा। ब्रिटिश मनोविज्ञानी केट फॉक्स कहती हैं कि हमारा एक बार सॉरी कहना, माफ़ी मांगना माना ही नहीं जाएगा। इसे हमें कई बार दोहराना होगा, लच्छेदार ज़बान में। तब जाकर माना जाएगा कि किसी ब्रितानी ने माफ़ी मांगी है।