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यहां बच्चों की गालियों से टीचरों का जीना हुआ मुश्किल

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ब्रिटेन में सोशल मीडिया ने स्कूल टीचरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक टीचर यूनियन के मुताबिक उन्हें सोशल मीडिया पर काफी गालियां झेलनी पड़ रही हैं। टीचर यूनियन एनएएसयूडब्लूटी के मुताबिक सोशल मीडिया पर टीचरों के खिलाफ लैंगिक, नस्ली एवं अन्य तरह की नकारात्मक टिप्पणियां की जा रही हैं। उनकी वेशभूषा की भी आक्रामक तरीके से आलोचना हो रही है।
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यूनियन के अनुसार कुछ बच्चों के अभिभावकों ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें गालियाँ दीं। इस साल अपनी राय जाहिर करने वाले 60 फीसदी टीचरों ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर गालियां झेलनी पड़ी हैं। जबकि पिछले साल 21 फीसदी टीचरों ने ऐसा होने की बात कही थी। इस यूनियन से करीब 15 सौ अध्यापक जुड़े हुए हैं।

तस्वीर लगाकर कर रहे कमेंट

एक मामला ऐसा भी रहा, जिसमें एक टीचर की तस्वीर ऑनलाइन पोस्ट करके उसके नीचे भद्दे कमेंट लिख दिए गए। एक अन्य मामले में छात्रों ने एक गर्भवती स्कूल कर्मचारी के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। जिन टीचरों को अपमान सहना पड़ा उनमें से 48 फीसदी ने कहा कि उनके ख‌िलाफ उनके छात्रों ने ही ऐसे कमेंट किए।

40 फीसदी टीचरों ने कहा कि उनपर अभिवावकों ने अपमानजनक कमेंट किए। 12 फीसदी टीचरों के अनुसार उनपर छात्रों और उनके अभिभावकों, दोनों ने ऐसे कमेंट किए।

सोशल मीडिया पर निशाना बने टीचरों में 33 फीसदी को अपने प्रदर्शन को लेकर तल्ख टिप्पणियां झेलनी पड़ीं। नौ फीसदी पर छात्रों ने अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया। वहीं आठ फीसदी छात्रों के कमेंट डराने वाले बर्ताव के बारे में थे।
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क्या है चिंता की बात

टीचर को निशाना बनाने वाले छात्रों में से 57 फ़ीसदी की उम्र 14 से 16 साल के बीच है। जबकि 11 से 14 साल के छात्रों की संख्या 38 फीसदी है।

यूनियन के मुताबिक एक टीचर के लिए एक छात्र ने कमेंट पोस्ट किया, "मैं आशा करती हूं कि उसे कैंसर हो जाए" यूनियन की जनरल सेक्रेट्री क्रिस कीट्स ने कहा, "टीचरों पर ऐसे कमेंट करने की प्रवृत्ति का बढ़ना गंभीर चिंता का मामला है। इसमें अभिभावकों की हिस्सेदारी भी उतनी ही चिंताजनक बात है।" कीट्स के अनुसार अपमानजनक और निजी टिप्पणियों का असर टीचरों की सेहत और आत्मविश्वास पर भी पड़ रहा है।
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