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बचा-कुचा खाना खाकर पले-बढ़े हैं कुत्ते

Fri, 25 Jan 2013 04:04 PM IST
बीबीसी हिंदी
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अगर आप एक अदद पालतू कुत्ते के मालिक हैं तो जाहिर है, अपने पालतू कुत्ते कि इस आदत से अंजान नहीं होंगे?
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अब तक आपको पता चल गया होगा कि ये बेचारा जानवर जरा सा मौका मिलने पर घर के कोनों या किचन में खाना ढूंढना शुरु कर देगा।

आपको उसकी इस आदत पर बड़ी खीझ भी आती होगी लेकिन, वैज्ञानिकों की माने तो कुत्तों के इस व्यवहार के पीछे की कहानी और वजह काफी अलग है।

एक ताजा अध्ययन के जरिए कुत्तों में पाए जाने वाले 'स्टार्च मेटाबॉलिज्म' यानि माड़ जैसे तरल पदार्थ युक्त खाना को पचाने की प्रक्रिया की तुलना भेड़ियों से की गई है। जिससे इस बात को बल मिलता है कि कुछ कुत्तों की प्रजातियां भेड़ियों से आई हैं।

'नेचर-जर्नल' पत्रिका को दी गई जानकारी में इस टीम ने बताया कि, ये कुत्ते शुरुआती दौर के किसानों के साथ रहा करते थे और उनके द्वारा पैदा किए अनाजों के बचे-कुचे कूड़े को खाकर अपना पेट भरा करते थे।
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इंसान का दोस्त
ये कोई नहीं जानता कि आखिर कब कुत्ते मनुष्य के इतने करीबी साथी बन गए? लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा दिए गए सबूत बताते हैं कि इसकी शुरुआत हजारों साल पहले हो चुकी थी।

एक सोच ये है कि इन कुत्तों का सबसे पहले इस्तेमाल तब शुरू हुआ, जब आदि मानव का मुख्य काम शिकार करना और घूम-घूमकर खाना ढूंढना हुआ करता था। तब ही उन्होंने जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा के लिए इन भेड़ियों या कुत्तों का अपने साथ रखना शुरु किया था।

लेकिन एक दूसरी सोच ये भी भी है कि ये भेड़िए हमारी जिंदगी का हिस्सा तब बनें जब इन्हें हमारा खाना चुराने की आदत लग गई और इन्होंने हमारे घर के आस-पास अपना बसेरा बसाना शुरु कर दिया।

उप्पसला विश्वविद्यालय के एरिक एकसल्सन के अनुसार, एक दूसरी अवधारणा के मुताबिक जब मनुष्य ने एक जगह पर रहना शुरु किया, तभी उसने खेती-बाड़ी शुरु कर दी।

ऐसे में उसके आस-पास काफी कचरा इकट्ठा होने लगा था और अचानक से वहां एक नई तरह का खाद्य-साधन पैदा होने लगा जो इन भेड़ियों का भोजन बन गया। बाद में इन्हीं भेड़ियों से कुत्तों का जन्म हुआ।

वे आगे कहते हैं कि हमें लगता है कि हमारी ये थ्योरी सही दिशा की तरफ जा रही है कि, असल में कुत्तों का जन्म बचे-खुचे और बेकार खाने के कचरे से हुआ है।

सामान्य कुत्ता
अध्ययन दल के वैज्ञानिक डॉ एक्सल्सन और उनके साथियों ने 50 से अधिक आधुनिक कुत्तों की प्रजाति के डीएनए की जांच की जिसमें कॉकर-स्पैनियर और जर्मन-शेफर्ड शामिल थे।

बाद में इन कुत्तों की जीन का मिलान दुनिया भर के 12 भेड़ियों की प्रजाति से किया गया। इस शोध के दौरान दो प्रमुख वर्ग के जीन का पता चला जिसमें से एक से 'दिमाग का विकास' होता था और दूसरे से 'स्टार्च मेटाबॉलिज़्म' का विकास होता है।

स्टार्च मेटाबॉलिज्म वो प्रक्रिया है, जिसके जरिए पेड़-पौधे और खर-पतवार में जमा हुए कार्बोहाईड्रेट के उन तत्वों को भेड़िए या बाद में कुत्ते पचा पाने में समर्थ हुए जिन पर फोटोसिंथेसिस यानि प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का असर नहीं होता।

कुत्तों पर किए गए अध्ययन से ये भी पता चला कि कुत्तों में उस तरह की जीन की संख्या कहीं ज्यादा है, जिससे वो एंजाईम पैदा होता है जो स्टार्च को पचा पाता है। जिससे इन कुत्तों के लिए इंसानों का साथी बनना ज्यादा आसान हो गया।

हालांकि एक्सलसन के मुताबिक ये जीन भेड़ियों में भी पाया जाता है, लेकिन वे उसका कुत्तों की तरह कुशलतापूर्वक इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि कुत्ते माड़ में जमा पोषण का इस्तेमाल भेड़ियों से बेहतर कर पाते हैं।

जहां तक दिमाग को विकसित करने वाली जीन का संबंध हैं तो इसका फर्क हमें दोनों जानवरों के स्वभाव को देखकर पता चल जाता है। कुत्ता, भेड़िए की तुलना में अधिक पालतू और विनम्र होता है जिससे वो आसानी से हमारे साथ घुल मिल जाता है।

एक्सलसल के अनुसार इससे पहले किए गए परीक्षणों में पाया गया है कि अगर हम किसी कम आक्रामक जीव को पसंद करते हैं तो इसके बदले हमें एक पालतू जानवर तो जरूर मिलता है लेकिन साथ ही साथ ऐसा भी जानवर मिलता है, जो बढ़ती उम्र में भी बच्चों जैसा प्यार-दुलार चाहता है। शायद यही कारण है कि कुत्तों में हमेशा बचपना बरकरार रहता है।

खुली बहस
हालांकि कुत्तों का जन्म कैसे हुआ इस पर अभी तक निर्विवाद रुप से कुछ कहा नहीं जा सकता है। कुछ जीवाश्म जहां इनकी उत्पत्ति दसियों हजार साल होने की बात करते हैं तो कुछ के मुताबिक कुत्ते पृथ्वी पर खेती-बाड़ी शुरू होने से पहले आ गए थे।

लेकिन कुछ वैज्ञानिक ऐसा नहीं मानते। एक विवादास्पद मुद्दा ये भी है कि जानवरों को पालतू बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई है। कंजर्वेशन एंड ईवोल्यूशनरी जेनेटिक्स ग्रुप के डॉ कार्लस विला के मुताबि मेरे ख्याल से आधुनिक कुत्तों का जन्म भेड़ियों की विभिन्न प्रजातियों से हुई है।
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कार्लस विला के अनुसार ये मुमकिन है कि, कुत्तों का जन्म कुछ समय पहले से पालतू जानवरों का भेड़ियों के साथ हाईब्रिडेशन के बाद हुआ हो या फिर ये भी कि ये बिल्कुल अलग प्रक्रिया होगी।

लेकिन इन सबमें जो बात बिल्कुल साफ है, वो ये कि वैज्ञानिकों को मिले कुछ कुत्तों के अवशेष या हड्डियां 14 हजार साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।

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