इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि इनके लोग देश को बांटने और नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस भारत के लोगों को जोड़ने का काम करती है। वह कल रात जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन ‘इंडियन ओवरसीज कांग्रेस’ ने किया था।
उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे भाषण दिए जा रहे हैं और नफरत पैदा की जा रही है, लेकिन किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं और नौजवान अपने लिए बेहतर भविष्य नहीं देख पा रहे हैं।
गांधी ने कहा, 'कांग्रेस का मतलब हिंदुस्तान के लोगों को आपस में जोड़ना है। यह सोच आप सभी लोगों में है। अगर आपके अंदर यह सोच नहीं होती तो आप जर्मनी में आकर सफलता कभी हासिल नहीं कर सकते थे।' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोगों को जोड़ने और साथ लेकर चलने की सोच उन्हें गुरुनानक से मिली है।
उन्होंने कहा, ' हमारी ताकत विविधिता में एकता है। हिेंदुस्तान का दर्शन यही है कि कमजोर व्यक्ति की सुनी जाए और उसकी मदद की जाए।' गांधी ने कहा, 'कांग्रेस सभी लोगों की पार्टी है, वह हर व्यक्ति के लिए काम करती है और हमारा काम विविधता में एकता पैदा करने का है। आज, भारत में सरकार दूसरे ढंग से काम कर रही है।'
उन्होंने आरोप लगाया, 'भाजपा-आरएसएस हमारे अपने लोगों को बांट रहे हैं। वे हमारे देश में नफरत पैदा कर रहे हैं। हमारा काम लोगों को साथ लाना और देश को आगे की ओर ले जाना है। हमने दिखाया है कि यह कैसे किया जा सकता है।'
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने देश को बांटा है। 1984 दंगों के लिए राहुल गांधी देश से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि आपने जिन अंग्रेजों के आगे घुटने टेककर देश को बांटा था उन्हीं के आगे देश बांटने की बात कर रहे हैं। आपने क्या नहीं बांटा धर्म, जाति, शिक्षा, संस्कृति सबको बांट दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने यह साबित कर दिया कि वह कांग्रेस में सबसे बुद्धिमान बेवकूफ हैं। संसद के हर सत्र के बाद वह विदेशी दौरों पर जाते हैं और कहते हैं कि हम ध्यान करने गए थे। इस बार जब आधिकारिक दौरे पर गए हैं तो गजब का ज्ञान बांट रहे हैं।
जो उनकी अपरिपक्वता, अक्षमता और मन की दुर्भावना को दर्शाती है। उनके अंदर प्रतिपक्ष का नेता बनने की समझ और क्षमता नहीं है। 1984 में जो हुआ था उसका पाप नहीं धुल सकता। नादिर शाह के बाद हुकुमत के साए में दिल्ली की सड़कों पर सबसे बड़ा कत्लेआम हुआ तो 1984 में हुआ। यह पाप बातों से नहीं धुलता।