विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2030 के सतत विकास लक्ष्य-3 (एसडीजी-3) में सभी देशों के लिए बाल मृत्यु दर का लक्ष्य तय किया है। इसमें हर साल 1000 जन्म पर नवजातों की 12 और 5 साल से कम उम्र के बच्चों की 25 से ज्यादा मृत्यु नहीं होनी चाहिए।
लेकिन बोरा-सैकिया के अध्ययन में पाया गया कि भारत ने पांच साल से कम बच्चों की मृत्यु दर के आंकड़े में वर्ष 1990 में 109 मौत प्रति 1000 जन्म को 23 साल बाद 2013 में घटाकर 50 मौत तक लाने में सफलता हासिल की, लेकिन तय लक्ष्य से ये अब भी दोगुना है। इसी तरह देश में हर 1000 जन्म पर 29 नवजातों की मौत का आंकड़ा वैश्विक मानक से करीब 2.4 गुना ज्यादा है।
अध्ययन में सामने आया कि उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे भयानक है, जहां 75 में से एक भी जिला पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में वैश्विक लक्ष्य नहीं छू पाया है। यूपी के अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश में नवजात मृत्यु दर भी मानकों से कहीं ज्यादा है।
अध्ययन में पाया गया कि एसडीजी-3 के तहत नवजात मृत्युदर का लक्ष्य छूने में देश के महज 9 फीसदी जिले ही सफल रहे हैं, जबकि 5 साल से कम उम्र के बच्चों को बचाने के लक्ष्य पर महज 14 फीसदी जिले ही खरा उतरे हैं।