बड़ी तादाद में लीक हुए वित्तीय दस्तावेजों से दुनियाभर के अमीर और ताकतवर लोगों के गुप्त तरीकों से टैक्स हेवन देशों में बड़े निवेश करने का पता चला है। ब्रिटेन की महारानी की निजी जागीर भी इन निवेशकों में शामिल है।
डोनाल्ड ट्रंप के वाणिज्य मंत्री के ऐसी कंपनी में हितों का पता चला है जो रूस के साथ व्यापार करती है और जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं। इस लीक को पेराडाइज पेपर्स कहा जा रहा है। इसमें 1.34 करोड़ दस्तावेज लीक हुए हैं। इनमें से अधिकतर दस्तावेज विदेशी निवेश देखने वाली एक कंपनी के हैं। दुनियाभर के करीब सौ मीडिया संस्थान इन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
पिछले साल के पनामा पेपर्स की ही तरह ये दस्तावेज जर्मन अखबार ज्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए थे। दस्तावेजों की जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है। इस पूरे सप्ताह सैकड़ों लोगों और कंपनियों की कर और वित्तीय जानकारियां साझा की जाएंगी। इनमें से कई के ब्रिटेन से गहरे संबंध हैं। रविवार को सामने आई बात का यह बहुत छोटा हिस्सा है।
कई कहानियां इस बात पर केंद्रित हैं कि कैसे राजनेताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सेलेब्रिटी और हाई प्रोफाइल लोगों ने ट्रस्ट, फाउंडेशन, कागजी कंपनियों के जरिए कर अधिकारियों से अपने कैश और सौदों को छुपाए रखा। अधिकतर लेनदेन में किसी तरह की कोई कानूनी गड़बड़ी नहीं है।
रविवार को ये प्रमुख कहानियां जारी की गईं
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रडो के करीबी सहयोगी ऐसी विदेशी स्कीम से जुड़े हैं, जिससे देश को करोड़ों डॉलर का नुकसान पहुंचा हो सकता है। टैक्स हेवन देशों को बंद करने के लिए अभियान चलाने वाले ट्रुडो के लिए इससे हालात शर्मनाक हो सकते हैं।
कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व डिप्टी चेयरमैन और बड़े दानदाता, लॉर्ड एश्क्रॉफ्ट ने अपने विदेशी निवेश के प्रबंधन में नियमों की अनदेखी की हो सकती है। अन्य दस्तावेजों से पता चलता है कि उन्होंने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अपना नॉन-डोम (गैर रिहायशी) दर्जा बरकरार रखा जबकि ऐसी रिपोर्टें आईं थी कि वो ब्रिटेन के स्थायी नागरिक बन गए हैं।
इवर्टन एफसी की एक मुख्य शेयरधारक कंपनी की फंडिंग पर किस तरह सवाल उठते हैं। इन दस्तावेज़ों से ये भी संकेत मिला है कि किस तरह से एलिशर उस्मानोव ने अपनी फर्म की जांच को प्रभावित किया है। इन दस्तावेजों को जारी करने वाले अन्य मीडिया संस्थान अपने क्षेत्र के हिसाब से कहानियां प्रकाशित कर रहे हैं।
जानिए, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ कैसे है इस मामले में शामिल
रानी एलिजाबेथ
- फोटो : File Photo
द पैराडाइज पेपर्स से पता चलता है कि ब्रितानी महारानी के निजी धन में से करीब एक करोड़ पाउंड विदेश में निवेश किए गए। इन पैसों को डची ऑफ लेंकास्टर ने कैयमन आइलैंड्स और बरमुडा के फंड में निवेश किया था। ये महारानी को आय देते हैं और उनके करीब 50 करोड़ पाउंड की निजी जागीर के निवेशों को संभालते हैं।
इन निवेशों में कुछ भी गैरकानूनी नहीं है और इसके कोई संकेत नहीं है कि महारानी कर नहीं चुका रही हैं, लेकिन ये सवाल पूछा जा सकता है कि महारानी को विदेश में निवेश करना चाहिए या नहीं।
गरीबों का शोषण करने के आरोप झेलने वाले रीटेलर समूह ब्राइटहाउस में भी छोटे निवेश किए। ऑफ-लाइसेंस फर्म थ्रेशर्स में भी निवेश किया गया। इस कंपनी ने बाद में 1.75 करोड़ पाउंड की देनदारी के साथ अपना काम बंद कर दिया था, जिससे 6 हजार लोगों की नौकरी चली गई थी।
डची का कहना है कि वह फंड के निवेश के बारे में लिए गए फैसलों में शामिल नहीं थी। इस बात के भी कोई संकेत नहीं है कि अपने लिए किए गए इन निवेशों के बारे में महारानी को जानकारी थी।
अतीत में डची की ओर से कहा गया था कि, "इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है कि उसके किसी कार्य या चूक से महारानी की प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर तो नहीं हो रहा है।" डची का ये भी कहना था कि महारानी अपनी जागीर में खासी रुचि रखती हैं।
रॉस और ट्रंप के लिए शर्मिंदगी?
विलबर रॉस और ट्रम्प
- फोटो : File Photo
1990 के दशक में विल्बर रॉस ने डोनल्ड ट्रंप को दीवालिया होने से बचाया था और अब ट्रंप ने इसका इनाम उन्हें अपने प्रशासन में वाणिज्य मंत्री बना कर दिया है।
दस्तावेजों से पता चलता है कि रॉस ने एक जहाजरानी कंपनी में निवेश बरकरार रखा जो रूस की एक ऊर्जा कंपनी के लिए गैस और तेल का परिवहन करके सालाना करोड़ों डॉलर कमाती है।
रूस की ऊर्जा फर्म में व्लादिमीर पुतिन के दामाद और अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दो लोगों का भी निवेश है। इससे एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप की टीम और रूस के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल इन आरोपों के साये में है कि रूस ने बीते साल हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों को प्रभावित करने में भूमिका निभाई है। ट्रंप ने इन आरोपों को 'फेक न्यूज' कहते रहे हैं।
कहां से आए हैं ये दस्तावेज?
पैराडाइज पेपर्स
- फोटो : ICIJ
ज्यादातर दस्तावेज ऐपलबी कंपनी के हैं। बरमुडा स्थित ये कंपनी कानूनी सेवाए देती है। ये अपने क्लाएंट्स को शून्य या बेहद कम कर वाले देशों में कंपनियां स्थापित करने में मदद करती है।
कंपनी के दस्तावेज और कैरीबियाई क्षेत्र के कार्पोरेट रजिस्टर के दस्तावेज जर्मन अखबार ज्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए थे। अखबार ने अपने सूत्र सार्वजनिक नहीं किए हैं।
दस्तावेजों की जांच करने वाले मीडिया संस्थानों का कहना है कि ये जांच जनहित में हैं, क्योंकि टैक्स हेवन देशों से लीक हुए दस्तावेजों से बार-बार गलत काम सामने आए हैं।
लीक के जवाब में ऐपलबी ने कहा है, "हम इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि हमारी ओर से या हमारे क्लाइंट्स की ओर से कुछ भी गलत नहीं किया गया है।" कंपनी ने कहा, "हम गैरकानूनी व्यवहार बर्दाश्त नहीं करते हैं।"
ऑफशोर फाइनेंस क्या है?
इसका मतलब है कि ऐसा स्थान जो किसी के अपने देश के कायदे कानूनों से बाहर है, जिसके जरिए लोग या कंपनियां पैसे, संपत्तियां या लाभ कहीं और भेजकर कम टैक्स अदा कर ज्यादा फायदा उठा सकें।
ऐसे स्थानों को आम भाषा में टैक्स हेवन कहा जाता है। इंडस्ट्री की भाषा में इन्हें ऑफशोर फाइनेंसियल सेंटर्स (ओएफसी) कहा जाता है। ये आमतौर पर स्थिर, भरोसेमंद और गुप्त होते हैं और अक्सर छोटे द्वीप होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ द्वीप ही होते हैं और इनमें गलत कार्यों को रोकने के लिए क्या उपाय हैं इसे लेकर भिन्नताएं हो सकती हैं।
ब्रिटेन यहां एक बड़ा खिलाड़ी है, सिर्फ इसलिए नहीं कि उसके कई विदेशी क्षेत्र और राजशाही निर्भर क्षेत्र ओएफसी हैं, बल्कि ऑफशोर इंडस्ट्री में काम कर रहे बहुत से वकील, अकाउंटेंट और बैंकर सिटी ऑफ लंदन में ही स्थित हैं।
साथ ही ये बेशुमार दौलतमंद लोगों से भी जुड़ा है। कैपिटल बिदाउट बॉर्डर्सः वेल्थ मैनेजर्स एंड द वन पर्सेंट के लेखक ब्रूक हैरिंगटन कहते हैं, "ऑफशोर फाइनेंस एक प्रतिशत के लिए नहीं है बल्कि .001 प्रतिशत के लिए है। वह कहती हैं कि योजना के लिए जितनी ऑफशोर फीस लगती है, 5 लाख डॉलर (3 लाख 80 हजार पाउंड) की संपत्ति उसके अनुरूप नहीं है।"
हम पर इसका क्या असर है और क्या हमें चिंता करनी चाहिए?
यहां बहुत ज्यादा पैसा है। द बोस्टन कंसल्टिंग के मुताबिक करीब 10 हजार अरब डॉलर ऑफशोर में हैं। ये रकम ब्रिटेन, जापान और फ्रांस के साझा जीडीपी के बराबर है और ये आकलन कम भी हो सकता है।
ऑफशोर के आलोचकों का तर्क है कि इसका मुख्य कारण गुप्तता है, जो गलत कार्यों के लिए रास्ते खोलती है, और गैर बराबरी है। आलोचकों का ये भी कहना है कि सरकार के इसे रोकने के लिए किए गए प्रयास धीमे और नाकाफी हैं।
ब्रूक हैरिंगटन कहती हैं कि अगर अमीर लोग कर चुकाना बंद कर दें तो भार गरीबों पर ही पड़ेगा। "एक कम से कम राशि होती है जिसकी जरूरत सरकार चलाने के लिए होती है। सरकार अमीरों और कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों जो गंवाती है, उसे हमारी खाल से निकालती हैं।"
ब्रिटेन की पब्लिक अकाउंट्स समिति की अध्यक्ष और लेबर पार्टी की सांसद मेग हीलियर ने कहा, "ऑफशोर क्या चल रहा है हमें ये देखना चाहिए। अगर ऑफशोर गुप्त नहीं होता तो इसमें से बहुत कुछ हुआ ही नहीं होता। हमें पारदर्शिता की जरूरत है और हम चाहते हैं कि इस पर रोशनी पड़े।"
ऑफशोर का बचाव क्या है?
ऑफशोर फाइनेंशियल सेंटर तर्क देते हैं कि अगर वो नहीं होते तो सरकार कितना टैक्स लगा सकती है, इस पर कोई बाधा ही नहीं होती। वो कहते हैं कि वो कैश के ढेर पर नहीं बैठे हैं बल्कि दुनियाभर में पैसों के लेनदेन के एजेंट के तौर पर काम करते हैं।
बॉब रिचर्ड्स से जब पैनोरमा ने अपने कार्यक्रम के लिए बात की थी तब वो बरमूडा के वित्त मंत्री थे। उन्होंने कहा था कि दूसरे देशों के लिए कर इकट्ठा करना उनका काम नहीं हैं और उन देशों को स्वयं अपनी समस्या सुलझानी चाहिए।
आयल ऑफ मैन के मुख्यमंत्री हॉवर्ड क्वाले और रिचर्ड्स ने इस बात से इनकार किया था कि उनके न्यायिक क्षेत्रों को टैक्स हेवन कहा जा सकता है, क्योंकि यहां नियम लागू हैं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियमों का पालन किया जाता है। हॉवर्ड क्वाले से पैनरोमा ने बात की थी। इन लीक्स में उनके राजशाही निर्भर क्षेत्र की अहम भूमिका है।
ऐपलबी ने भी अतीत में कहा था कि ओएफसीज "ऐसे लोगों की घूसखोर सरकारों से रक्षा करती है जो अपराध, भ्रष्टाचार या अभियोगों के पीड़ित हों।" पैराडाइज पेपर्स- ये बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज हैं, जिनमें ज्यादातर दस्तावेज आफशोर कानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं। इनमें 19 तरह के टैक्स क्षेत्र के कारपोरेट पंजीयन के पेपर भी शामिल हैं। इन दस्तावेजों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है।
1।34 करोड़ दस्तावेज़ों को जर्मन अखबार ने हासिल किया है और इसे इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) से शेयर किया है। 67 देशों के करीब 100 मीडिया संस्था से इसमें शामिल हैं, जिसमें गार्डियन भी शामिल है।