ग्रीस की संसद ने सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार की ग़र्ज़ से लाए गए विधेयक को मंज़ूरी दे दी है, जिसका मतलब होगा हज़ारों नौकरियों की कटौती।
हालांकि संसद में बिल उतनी आसानी से पास नहीं हुआ क्योंकि 140 सासंदों ने इसके ख़िलाफ़ वोट डाला। विधेयक के पक्ष में कुल 153 सांसद ही थे।
क़र्ज़ की शर्त के मुताबिक़ ग्रीस को लगभग सात अरब डॉलर की आर्थिक मदद पाने वाले सुधार विधेयक को पास करना ज़रूरी था।
गंभीर आर्थिक संकट झेल रहे इस यूरोपीय देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष या आईएमएफ़ और यूरोपीय संघ से क़र्ज़ मिला है लेकिन उसकी शर्तों के भीतर मुल्क को ढेर सारे आर्थिक सुधारों को लागू करना होगा।
'कोई चारा नहीं...'
ग्रीस को लगभग सात अरब डॉलर की आर्थिक मदद पाने के लिए सुधार विधेयक को पास करना ज़रूरी था।
हालांकि इसे लेकर मुल्क में पिछले दिनों भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जिस समय संसद में विधेयक पर बहस हो रही थी तब भी वहां हज़ारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे्।
बिल के पास होने के बाद बहुत सारे लोग हताश और उदास हो कर वहां से चले गए।
गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री एंटोनिस समारास का कहना है कि उनके पास इस दुखद समझौते को आगे लागू करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
सुधार के अंतर्गत चार हज़ार लोगों को साल के आख़िर तक नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा। पच्चीस हज़ार लोगों को एक ऐसे समूह में डाला जाएगा जिन्हें एक ख़ास अवधि के भीतर अपने लिए नई नौकरियों की तलाश करनी होगी।
इस दौरान उन्हें अभी की तुलना में कम तन्ख़्वाह मिलेगी।
पूरानी कटौतियां
पहले लागू हुए आर्थिक सुधारों के बाद भी लोगों की तन्ख़्वाहों में कटौतियां हुई थीं और उन्हें पेंशन से हाथ धोना पड़ा था।
लेकिन राजधानी एथेंस से बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस का कहना है कि इन सब कटौतियों के बाद भी ये महसूस किया जा रहा है कि ग्रीस का क़र्ज़ बहुत अधिक है।
संवाददाता का कहना है कि आज या कल इस मामले में नई बहस शुरू होगी कि क्या ग्रीस पर मौजूद ऋण के एक और हिस्से को माफ़ किया जाए? जिसका मतलब होगा कि यूरोपीय संघ के देनदार मुल्कों को जिन्होंने ग्रीस को क़र्ज़ दे रखा है, उनके पैसे कभी वापस नहीं मिलेंगे।
ग्रीस में इस समय बेरोज़गारी की दर 27 फ़ीसदी है, और वहाँ पिछले सालों में भारी जारी राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई है।