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जर्मनी रख रहा मस्जिदों के विदेशी मददगारों पर निगाह, कट्टरपंथ रोकने की कवायद

Sun, 30 Dec 2018 04:49 AM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पिछले कुछ वर्षों से जर्मनी में दक्षिणपंथी नेताओं के उभरने के साथ ही देश की नीतियों में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आमतौर पर शरणार्थी मुस्लिम परिवारों और उनके मामलों में उदारता बरतने वाली जर्मनी सरकार ने देश की मस्जिदों को आर्थिक मदद देने वाले दूसरे देशों से आग्रह किया है कि वे ऐसी किसी भी रकम के बारे में जर्मन अधिकारियों को अवश्य बताएं। यानी जर्मनी की मस्जिदों में होने वाली विदेशी फंडिंग पर खुफिया निगरानी शुरू हो गई है। इस फैसले से देश की मस्जिदों में बढ़ते कट्टरपंथ को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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जर्मन विदेश मंत्रालय चाहता है कि सऊदी अरब, कतर, कुवैत और दूसरे खाड़ी देशों से यदि जर्मनी में मौजूद मस्जिदों को कोई मदद भेजी जाती है, तो इसका ब्यौरा आवश्यक रूप से दर्ज होना चाहिए। एनडीआर की रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार ने घरेलू और विदेशी खुफिया सेवाओं से इस बात पर नजर रखने को कहा है कि कौन मदद भेज रहा है और वह मदद देश में किसे मिल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक इस निर्देश पर पहले ही अमल होना शुरू हो गया है। नवंबर में जर्मनी में हुई इस्लाम कांफ्रेंस के दौरान जर्मन गृह मंत्री होर्स्ट जेहोफर ने कहा था कि वह जर्मनी की मस्जिदों में विदेशी प्रभाव को कम करेंगे।

बताया जा रहा है कि कुवैत के साथ सहयोग के अच्छे नतीजे मिलने शुरू भी हो गए हैं जबकि अन्य देश इस बारे में सहयोग करने से हिचक रहे हैं। हालांकि एनडीआर रिपोर्ट के मुताबिक देश के पास ऐसे कोई विश्वसनीय आंकड़े मौजूद नहीं है, जिनसे पता चल सके कि खाड़ी देशों से जर्मनी में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों को कितनी रकम भेजी गई है।

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मस्जिद टैक्स की कवायदें भी जारी

जर्मनी में बढ़ती दक्षिणपंथी ताकतों को बीच देश के मुसलमानों पर मस्जिद टैक्स लगाने की बातें भी चल रही हैं। ऐसा इसलिए ताकि उससे मस्जिदों की फंडिग की जा सके। जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में ईसाईयों से चर्च टैक्स लिया जाता है, ताकि चर्चों की आर्थिक जरूरतें पूरी की जा सकें। जानकारों का कहना है कि मुसलमानों पर इस तरह का मस्जिद टैक्स लगाने पर मस्जिदों पर विदेशी प्रभाव को घटाने में मदद मिलेगी।

सलाफी गतिविधियों की निगरानी

जर्मनी के संयुक्त आतंकवाद विरोधी सेंटर (जीटीएजेड) की रिपोर्टों के आधार पर सरकार 2015 से जर्मनी में अरब खाड़ी देशों से आए सलाफी मिशनरियों की गतिविधियों की निगरानी कर रही है। 2015 में लाखों शरणार्थी जर्मनी आए थे। जर्मन खुफिया एजेंसियों का कहना है कि खाड़ी देशों से आने वाले मिशनरी समूह जर्मनी और यूरोप में सलाफियों से जुड़े रहे हैं।
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