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बकरियां गुस्साए और मुस्कुराते चेहरों में फर्क जानती हैं, शोध में हुआ अहम खुलासा

Thu, 30 Aug 2018 05:00 AM IST
एजेंसी, लंदन
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Dr. Alan McElligott with a goat. (Credit: Alan McElligott)
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आमतौर पर इंसान न तो पशुओं की भाषा को प्रत्यक्ष रूप से समझ पाता है और न ही उनकी भावनाओं के हिसाब से खुद को ढाल पाता है। लेकिन हाल ही में हुआ शोध बताता है कि बकरियां इंसानों के मुस्कुराते और गुस्साए चेहरों में फर्क करना जानती हैं।

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बकरियों पर हुए इस शोध में इस जानवर को एक व्यक्ति की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गईं। एक तस्वीर में इंसान के चेहरे पर खुशी के भाव थे तो दूसरी में गुस्से के। शोधकर्ताओं ने देखा कि 20 पालतू बकरियां इस प्रयोग में मुस्कराते हुए चेहरे की तरफ गईं और अपने थूथन से उसे छूआ।

लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और सह-लेखक क्रिस्टियान नावरोथ के मुताबिक बकरियों ने खुशी वाले चेहरे के साथ औसतन 1.4 सेकंड और क्रोधित चेहरे के साथ 0.9 सेकंड का समय बिताया। इसका अर्थ है कि बकरियां तकरीबन 50 फीसदी अधिक समय मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ रहीं।
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विज्ञान पत्रिका रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में प्रकाशित इस शोध का दावा है कि यह बकरियों में इंसानी भावों को पढ़ने की क्षमता का पहला सबूत है। नावरोथ के मुताबिक, अपने आसपास का माहौल समझने में पशुओं का दिमाग काफी विवेकशील होता है। वे आदमी के चेहरे के भावों को समझ कर उसके मुताबिक अपने व्यवहार को ढाल लेते हैं।

बकरियों को आम तौर पर उनसे मिलने वाले दूध और मांस के लिए पाला जाता रहा है, लेकिन अब तक यह नहीं पता था कि उनमें इंसानी भावनाओं की इतनी समझ होती है जैसी कि कुत्तों या घोड़े जैसे पशुओं में होती है।

दिमाग के बाएं हिस्से का प्रयोग करती हैं बकरियां
एक अन्य शोधकर्ता एलन मैकइलिगोट ने बताया कि यह अध्ययन मवेशियों और अन्य पशुओं के साथ हमारे संपर्क के तौर तरीकों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इंसानी भावों को समझने की क्षमता सिर्फ पालतू जानवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काफी व्यापक हो सकती है।

टीम ने पाया कि जब हंसते-खिलखिलाते चेहरों वाली तस्वीरों को गुस्से वाली तस्वीर की दाईं तरफ रखा गया तो भी बकरियां खुशी वाली तस्वीरों की तरफ गईं। इससे पता चलता है कि ये पशु किसी सकारात्मक भाव को समझने के लिए दिमाग के बाएं हिस्से का प्रयोग करते हैं।

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