दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन का असर अब तेजी से दिखने लगा है। इस बीच यूरोप की जलवायु परिवर्तन एजेंसी कॉपरनिकस ने डराने वाली भविष्यवाणी की है। एजेंसी ने कहा है कि यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल होगा। बयान में कहा गया है कि यह पहली बार होगा, जब औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा होगा।
कॉपरनिकस ने यह भविष्यवाणी इसी साल अक्तूबर के सबसे गर्म रहने के बाद की है। 11 नवंबर को अजरबैजान के बाकू में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की जलवायु कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले कॉपरनिकस के इस एलान ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। यूएन की इसी कॉन्फ्रेंस में विकसित देश जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए विकासशील देशों को 2025 से आर्थिक मदद देने पर सहमत हो सकते हैं।
कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की उप-निदेशक समांथा बर्जेस ने कहा, "2024 के 10 महीनों के बाद यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल होगा। बयान में कहा गया है कि यह पहली बार होगा, जब औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा होगा। यह वैश्विक तापमान की बढ़ोतरी में नया रिकॉर्ड होगा और कॉप29 समिट से पहले जलवायु परिवर्तन को लेकर एक अहम मुद्दा होना चाहिए।"
यूरोपीय एजेंसी के वैज्ञानिकों ने ही पिछले महीने बताया था कि 2024 का अक्तूबर पूरी दुनिया में दूसरा सबसे गर्म अक्तूबर रहा। इससे पहले 2023 का अक्तूबर भी काफी गर्म था, तब सतह पर हवा का औसत तापमान 15.25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो कि 1991 से 2020 के अक्तूबर के औसत तापमान से 0.80 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।
इतना ही नहीं 2024 के पहले 10 महीनों (जनवरी से अक्तूबर) में औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के बीच इसी दौर के मुकाबले 0.71 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। वहीं, जनवरी-अक्तूबर 2023 के मुकाबले इस साल इसी दौर में तापमान 0.16 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।