एल सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना है, जिसने बिटकॉइन को लीगल टेंडर (यानी आधिकारिक मुद्रा) के रूप में मान्यता दी है। लेकिन जानकारों ने इसे कोई बड़ा कदम मानने से इनकार किया है। बल्कि उन्होंने इसे एल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बकेले का पब्लिसिटी स्टंट बताया है। राष्ट्रपति की पहल पर बिटकॉइन को लीगल टेंडर बनाने का प्रस्ताव एल सल्वाडोर की संसद ने भारी बहुमत से पारित कर दिया। 84 सदस्यीय सदन के 62 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया।
राष्ट्रपति बकेले ने बीते शनिवार को अमेरिका के मयामी में बिटकॉइन को लीगल टेंडर बनाने के एलान किया था। संसद में उन्होंने कहा कि उनके इस कदम से देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही देश के वित्तीय संस्थानों के लिए ये कदम मददगार होगा। लेकिन जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति बकेले ने ये कदम उठा कर दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की है कि एक भविष्यद्रष्टा नेता हैं। जबकि असल हकीकत यह है कि इस पिछड़े देश में ऐसे बहुत कम लोग हैं, जो बिटकॉइन में निवेश की तकनीकी क्षमता रखते हैं।
एल सल्वाडोर के स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स में प्रोफेसर कार्लोस कारकैच ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बातचीत में ध्यान दिलाया कि बिटकॉइन एक बेहद उतार-चढ़ाव वाली मुद्रा है। इसका मतलब यह है कि इसमें पैसा लगाने वाले लोगों के एक दिन में धनी और अगले ही दिन गरीब बन जाने की संभावना रहती है। साथ ही इसे लीगल टेंडर बनाना न तो जरूरी था, और न ही उससे देशवासियों को कोई सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा है, जो बिटकॉइन स्वीकार करने को तैयार हो, तो वह डॉलर को भी स्वीकार कर सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल अमेरिका में मानव अधिकार संस्थान के निदेशक फादर जोस मारिया तोयेरिया ने द गार्जियन से कहा- ‘ये फैसला समझ से बाहर है। इसका मकसद एक तमाशा खड़ा करना है, जो इस सरकार की खासियत रही है। यानी ढेर सारा प्रचार, लेकिन न के बराबर ऐसे ढांचागत सुधार, जिनसे गरीब आबादी को मदद मिल सके।’ क्रिस्टोसाल ह्यूमन राइट्स ग्रुप के कार्यकर्ता डेविड मोरालेस ने इस फैसले को राजनीतिक मार्केटिंग बताते हुए ध्यान दिलाया है कि इस फैसले में सरकार ने जैसी तेजी दिखाई, वैसा उसने जल अधिकार संबंधी सुधारों के लिए नहीं दिखाया है। ना ही उसने एल सल्वाडोर में उत्पीड़न का कारण बने गर्भपात कानून को बदलने की इच्छा दिखाई है।
बकेले ने कहा है कि एल सल्वाडोर में 70 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो पारंपरिक वित्तीय सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे में विदेश में कमाने वाले लोगों को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अपनी कमाई वापस देश में भेजना आसान होगा। लेकिन जानकारों का कहना है कि बिटकॉइन का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को अकसर दलालों की जरूरत पड़ती है। इसे खरीदना और बेचना एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए तकनीकी ज्ञान की जरूरत पड़ती है।
फिर भी बिटकॉइन के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एल सल्वाडोर का इस मामले में क्या अनुभव रहता है, इस पर दुनिया की निगाह रहेगी। क्रिप्टो फंड डिजिटल एसेट कैपिटल मैनेजमेंट से जुड़े रिचर्ड गैल्विन ने कहा है कि एल सल्वाडोर के इस कदम से बिटकॉइन को बहुत बढ़ावा मिलेगा। इसका असर अगले दो से तीन साल में नजर आएगा।