अब लोग ये जानना चाहते हैं कि कोरोना का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। कौन सा अंग कितना प्रभावित होता है। डब्ल्यूएचओ पहले ही कह चुका है कि कोरोना पीडि़त 80 फीसदी लोग बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो गए हैं। रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड रेस्पिरेटरी फिजिशियन के प्रो. जॉन विलसन का कहना है कि कोरोना पीड़ितों में निमोनिया के गंभीर लक्षण दिखते हैं। कोराना की चपेट में आए व्यक्ति में लक्षण नहीं भी दिख सकता है। निमोनिया से जुड़ी गंभीर समस्या भी जानलेवा हो सकती है।
कोरोना से हुआ निमोनिया कुछ अलग
प्रो. विल्सन बताते हैं कि निमोनिया जीवाणुओं से होता है जो एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए ठीक हो जाता है। हां इसका कोई साक्ष्य नहीं है कि कोरोना से हुआ निमोनिया गंभीर है लेकिन ये पता चला है कि कोरोना निमोनिया से थोड़ा नहीं बल्कि पूरा फेफड़ा प्रभावित होता है।
- कोरोना का वायरस शरीर में हो लेकिन ऐसे लोगों में लक्षण नहीं दिखता है। ऐसे लोगों को खतरा कम रहता है।
- श्वास नलिका के ऊपरी हिस्से में संक्रमण हो यानी ऐसे व्यक्ति को बुखार के साथ कफ की शिकायत हो। हल्का लक्षण भी दिखे जिसमें सिर में दर्द और आंखों में संक्रमण की समस्या हो जाए।
- ऐसे लोग जिनमें इस रोग का बहुत हल्का लक्षण दिखता है लेकिन उसकी फैलने की क्षमता होती है लेकिन उन्हें इसके बारे में पता नहीं होता है।
- इस रोग के गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं और उन्हें कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं।
कफ और बुखार से श्वास नलिका में संक्रमण
प्रो. विलसन कहते हैं कि कोरोना के संक्रमण के चलते कफ और बुखार की तकलीफ होती है इसका कारण श्वास नलिका में संक्रमण होता है। यही हवा श्वास नलिका और फेफड़ों को संक्रमित करती है। श्वास नलिका की लाइनिंग क्षतिग्रस्त होती है और उसमें सूजन आ जाती है। इस वजह से श्वास नलिका में परेशानी बढ़ती है और कफ के रूप में गंदगी बाहर आने लगती है। यही गंदगी फेफड़ों तक पहुंच जाती है तो फेफड़ा रक्त प्रवाह में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है। इससे शरीर कमजोर पड़ने लगता है और कार्बनडाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से निमोनिया होता है।
निमोनिया का इलाज कैसे संभव है
ऑस्ट्रेलिया लंग फाउंडेशन के प्रो. क्रिस्टिन जेनकिन्स कहते हैं कि हमें दुख है कि अभी तक कोरोना से बचाव के लिए हमारे पास कुछ नहीं है। निमोनिया ग्रसित व्यक्ति को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर ऑक्सीजन देते हैं। इस दौरान रोगी एंटी वायरल दवाएं और एंटीबायोटिक दी जाती हैं।