दक्षिण पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लुडिंग काउंटी में आज भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:25 बजे आए भूकंप की तीव्रता 6.8 मापी गई। भूकंप का केंद्र 29.59 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 102.08 डिग्री पूर्वी देशांतर में 16 किमी की गहराई पर थी। इस दौरान 30 लोगों की मौत की खबर है।
तिब्बत से सटे सिचुआन प्रांत को भूकंप से अधिक खतरा रहता है। तिब्बती पठार को भी भारी भूकंपों के लिए प्रवण माना जाता है क्योंकि यह उस जगह पर बैठता है जहां टेक्टोनिक यूरेशियन और भारतीय प्लेटें मिलती हैं, जो अक्सर भारी बल से टकराती हैं।
यह प्रांत पहले ही कोरोना के बढ़ते मामलों और सूखे की समस्या से जूझ रहा है। चीन के सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों और वीडियो में चेंगदु में इमारतों को हिलते हुए देखा जा सकता है। अभी किसी इमारत को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है।
यहां 2008 में 8.2 की तीव्रता वाला विनाशकारी भूकंप आया था, जिसमें करीब 69,000 लोगों की मौत हो गई थी। 2013 में सात की तीव्रता के भूकंप में भी 200 लोगों की जान चली गई थी। चेंगदु में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 5.3 की तीव्रता का भूकंप, छह मरे 9 घायल
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कई प्रांतों में सोमवार सुबह 5.3 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके आए। इसके चलते अफगानिस्तान में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। भूकंप में नौ अन्य लोग घायल हो गए हैं। पाकिस्तान में इस्लामाबाद, रावलपिंडी, पेशावर, मर्दन, एबटाबाद में झटके आए।
अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के एक स्थानीय अधिकारी ने कहा कि नूरगुल जिले में ही भूकंप से छह लोगों की मौत हुई है। मकान गिरने से अन्य कई घायल हुए हैं। वहीं, अफगानिस्तान के टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक प्रांत के कई इलाकों में दर्जनों घर तबाह हो गए।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप का केंद्र पूर्वी नंगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद था। जो 10 किलोमीटर की गहराई पर 2:27 बजे आया। रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप ने काबुल, नंगरहार, लगमन, कुनार व नूरिस्तान के साथ-साथ डूरंड रेखा के दूसरी तरफ के कुछ क्षेत्रों को हिलाकर रख दिया। पाकिस्तान में किसी बड़ी क्षति नहीं हुई है।
जानें क्यों आता है भूकंप?
धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती हैं। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है जिसे टैकटोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर कंपन करती रहती हैं और जब इस प्लेट में बहुत ज्यादा कंपन हो जाती है, तो भूकंप महसूस होता है।
जानिए भूकंप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?
भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से धरती हिलने लगती है। इस स्थान पर या इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का असर ज्यादा होता है। अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।