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जॉर्ज सोरोस को जयशंकर की दो टूक: 'ऐसे लोग सोचते हैं कि चुनाव सिर्फ तभी अच्छे हैं, जब उनकी पसंद के लोग जीतें'

Sat, 18 Feb 2023 11:49 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिडनी

सार

भारत के लोकतंत्र पर टिप्पणी करने वाले अरबपति निवेशक पर जयशंकर ने कहा, "मैं सोरोस को सिर्फ बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाला कहकर रुक सकता हूं। लेकिन वे बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले के साथ खतरनाक भी हैं।"
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विदेश मंत्री एस जयशंकर और अरबपति जॉर्ज सोरोस। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस अदाणी-हिंडनबर्ग मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी के बाद से ही चर्चा में हैं। मोदी सरकार के मंत्रियों ने सोरोस की भारतीय लोकतंत्र को लेकर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की है। वहीं, विपक्ष ने भी सोरोस पर निशाना साधा है। इस बीच अपने सीधे और स्पष्ट तर्कों से भारत की विदेश नीति का परिदृश्य रखने वाले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोरोस के बयान को लेकर टिप्पणी की है। 
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सोरोस पर क्या बोले जयशंकर?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "सोरोस मानते हैं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक नहीं है। कुछ समय पहले ही उन्होंने हम पर आरोप लगाया था कि हम करोड़ों मुस्लिमों की नागरिकता छीनने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि जाहिर तौर पर नहीं हुआ। मैं कह सकता है कि मिस्टर सोरोस एक बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले व्यक्ति हैं, जो कि अभी भी न्यूयॉर्क में बैठे हैं और सोचते हैं कि उनके विचारों से फैसला होना चाहिए कि पूरी दुनिया कैसे चलेगी। 

जयशंकर ने आगे कहा, "मैं सोरोस को सिर्फ बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाला कहकर रुक सकता हूं। लेकिन वे बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले के साथ खतरनाक भी हैं। जब ऐसे लोग और संस्थान विचार रखते हैं, तो वे अपने संसाधनों को नैरेटिव गढ़ने में लगा देते हैं।"

जयशंकर ने कहा, "सोरोस जैसे लोगों को लगता है कि चुनाव तभी अच्छे हैं, जब उनकी पसंद का व्यक्ति जीत जाए। लेकिन अगर चुनाव का नतीजा कुछ और होता है, तो वह उस देश के लोकतंत्र को त्रुटिपूर्ण कहने लगते हैं और यह सब एक खुले समाज की वकालत करने के नाम पर किया जाता है। "

भारत के लोकतंत्र पर भी की टिप्पणी
भारत के विदेश मंत्री ने लोकतंत्र पर अपनी राय रखते हुए कहा, "आज जब मैं अपने लोकतंत्र को देखता हूं। यहां पर मतदाताओं की भागीदारी, जो कि अभूतपूर्व है; चुनाव के नतीजे, जो कि निर्णायक हैं; चुनावी प्रक्रिया, जिस पर सवाल नहीं उठते। हम वह देश नहीं हैं, जहां चुनाव के बाद इसे चुनौती देने के लिए कोई कोर्ट जाता है।"

क्या बोले थे जॉर्ज सोरोस?

अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस का कहना है कि गौतम अदाणी के कारोबारी साम्राज्य में मची उथल-पुथल से शेयर बाजार में बिकवाली आई है और इससे निवेश के अवसर के रूप में भारत में विश्वास हिला है। यह देश में लोकतांत्रिक पुनरुद्धार के दरवाजे खोल सकता है। सोरोस के इस बयान पर भाजपा ने भी पलटवार किया है।

सोरोस, जिनकी नेटवर्थ लगभग 8.5 बिलियन डॉलर है ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के संस्थापक हैं। यह फाउंडेशन लोकतंत्र, पारदर्शिता और बोलने की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाले समूहों और व्यक्तियों को अनुदान देता है।
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क्या मोदी सरकार इतना कमजोर, सोरोस के एक बयान से गिर जाएगी: चिदंबरम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की एक हालिया टिप्पणी की पृष्ठभूमि में शनिवार को कहा कि क्या नरेन्द्र मोदी सरकार इतना कमजोर है कि सोरोस के एक बयान भर से गिर जाएगी।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भारत के लोग तय करते हैं कि कौन सरकार में होगा और कौन इससे बाहर होगा। मैं नहीं जानता था कि मोदी सरकार इतनी कमजोर है कि 92 साल के एक अमीर विदेशी नागरिक के बयान से गिर जाएगी।’’ चिदंबरम ने यह भी कहा कि सोरोस नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थशास्त्री नुरिएल रुबिनी के इस बयान पर ध्यान देना चाहिए कि भारत में बड़े कारोबारी समूहों पर बढ़ती निर्भरता का नतीजा यह हो सकता है कि प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो और नये उद्यमी आगे नहीं बढ़ सकें।

सोरोस ने पिछले दिनों कहा कि भारतीय व्यवसायी गौतम अडाणी के कारोबारी साम्राज्य में उथल-पुथल ने निवेश के अवसर के रूप में भारत में विश्वास को हिला दिया है और यह भारत में ‘‘लोकतांत्रिक पुनरुद्धार’’ के द्वार खोल सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को सोरोस पर जोरदार हमला करते हुए उन पर न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली को भी निशाना बनाने का आरोप लगाया।
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