विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को प्राग में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने स्वदेश के घटनाक्रमों और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। विदेश मंत्री की प्राग यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है कि चेक गणराज्य अगले माह से ईयू का अध्यक्ष बनने वाला है।
जयशंकर दो मध्य यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को और गति देने के लिए स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के अपने दो देशों के दौरे के अंतिम चरण में प्राग पहुंचे थे। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारतीय समुदाय से मिलकर खुशी हुई। उनमें से कई को इतना अच्छा काम करते हुए देखकर अच्छा लगा। भारतीय समुदाय का विस्तार भी उत्साहजनक रहा है। उनके साथ घरेलू विकास और हमारे द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति को साझा किया। जयशंकर शनिवार को चेक गणराज्य की राजधानी ब्राटिस्लावा से प्राग पहुंचे थे। 1 जुलाई से चेक गणराज्य योरपीय संघ (EU) का अध्यक्ष पद संभालने वाला है। इसलिए उनकी प्राग यात्रा महत्वपूर्ण है।
चेक गणराज्य में करीब 5 हजार भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से अधिकांश आईटी पेशेवर, कारोबारी और विद्यार्थी हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार वहां भारतीयों व भारतीय मूल के लोगों के कई संगठन हैं। ये भारतीय दूतावास के साथ मिलकर अपने समुदाय के लिए कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं।
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से जूझ रहा यूरोप
विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे वक्त में हुई, जब यूरोप यूक्रेन पर रूसी हमले से उत्पन्न संकटों से जूझ रहा है। यूरोपीय देश चाहते हैं कि भारत रूस के खिलाफ कठोर कदम उठाए। इसलिए वे भारत को सहमत कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जयशंकर की इस यात्रा के पहले विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि विदेश मंत्री चेक गणराज्य के अपने समकक्ष के साथ हमारे द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा करेंगे।
हिंद-प्रशांत के साथ भारत संबंधों पर चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को यूरोपीय संसद के चेक सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। इसमें यूरोपीय यूनियन और चेक गणराज्य के साथ भारत के संबंधों, हिंदू-प्रशांत, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा तथा डिजिटल सहयोग जैसे मुद्दों पर अच्छी चर्चा हुई। इसकी जानकारी खुद विदेश मंत्री ने ट्वीट कर दी।
स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के अपने दौरे के आखिरी चरण में विदेश मंत्री शनिवार को चेक गणराज्य के प्राग पहुंचे। चेक गणराज्य एक जुलाई से यूरोपीय यूनियन की अध्यक्षता संभालेगा। प्राग में जयशंकर यूरोपीय संसद के चेक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल जान जहरादिल, टॉम जेडेचोव्स्क, मिकुल पेक्सा और वेरोनिका व्रेकोनोव से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जयशंकर ने ट्वीट कर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का धन्यवाद किया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को देखते हुए भारत, अमेरिका और दुनिया के अन्य देश इलाके के स्वतंत्र, खुले और संपन्न क्षेत्र सुनिश्चित करने की जरूरत पर बात कर रहे हैं। चीन दक्षिण चीन सागर में कई इलाकों पर अपना दावा करता आ रहा है जबकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रुनेई, मलयेशिया और वियतनाम भी इसके हिस्सों पर अपना दावा करते रहे हैं। इतना ही नहीं, बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में सैन्य प्रतिष्ठान और कृत्रिम द्वीप भी बना लिए हैं।
जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूरोप यूक्रेन में रूस के हमले के असर से जूझ रहा है। चेक गणराज्य के दौरे में यह मुद्दा भी उठने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने जयशंकर के दौरे से पहले कहा था कि वह चेक गणराज्य के विदेश मंत्री जान लिपाव्स्की के साथ वार्ता करेंगे। इसमें दोनों देशों के बीच सहयोग की समग्र समीक्षा होगी। साथ ही विदेश मंत्री चेग गणराज्य में पढ़ रहे भारतीय छात्रों और प्रवासियों से संवाद करेंगे।