अफगानिस्तान के तालिबान शासन के साथ बढ़ रहे तनाव से पाकिस्तान के लिए सुरक्षा संबंधी अंदरूनी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे पर्यवेक्षकों ने ये आशंका जताई है। उनके मुताबिक अफगान तालिबान का दबाव हटने के बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान के अंदर अपने हमले तेज कर सकता है।
पिछले महीने अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत में पाकिस्तान से लगी सीमा पर तालिबान लड़ाकों ने बाड़ लगाने का काम जबरन रोक दिया था। उन्होंने बाड़ लगाने में काम आने वाली सामग्रियां जब्त कर ली थीं। साथ ही पाकिस्तान की सेना को चेताया था कि आगे वह बाड़ लगाने का काम ना करे। जबकि मेजर जनरल इफ्तिखार ने कहा कि बाड़ सीमा के दोनों तरफ के लोगों की रक्षा के लिए लगाई जा रही है। साथ ही इसका मकसद व्यापार को नियमित करना है। उन्होंने कहा- ‘पाक-अफगान सीमा पर सुरक्षा, सीमा के आर-पार आने-जाने, और व्यापार को रेगुलेट करने के लिए बाड़ की जरूरत है। इसका मकसद लोगों को बांटना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित करना है।’
तालिबान को एतराज इस बात पर है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सरहद को बिना तय किए पाकिस्तान बाड़ लगा कर अपना दावा मजबूत कर रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है। लेकिन तालिबान इस सीमा रेखा को मान्यता नहीं देता। इफ्तिखार ने बताया कि बाड़ लगाने का काम 94 फीसदी पूरा हो चुका है। लेकिन उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कुछ व्यावहारिक मसले हैं, जिन्हें हल किया जा रहा है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब गौर करने की बात टीटीपी का रुख है। टीटीपी ने बीते नवंबर में अफगान तालिबान के दबाव में पाकिस्तान सरकार के साथ लड़ाई रोकने का समझौता किया था। समझौते की अवधि पूरी होने के बाद पिछले नौ दिसंबर को उसने ये समझौता तोड़ दिया। उसके बाद से उसने पाकिस्तान के अंदर कई हमले किए हैं। समझा जाता है कि पाकिस्तान से अफगान तालिबान के रिश्तों में आती कड़वाहट से टीटीपी का मनोबल और बढ़ेगा।