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अफ्रीका: सूडान और दक्षिण सूडान के बीच विवादित क्षेत्र में ड्रोन हमला, 153 लोगों की मौत; किसने बनाया निशाना?

Wed, 21 Oct 2026 12:38 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओस्लो (नॉर्वे)
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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सूडान और दक्षिण सूडान के बीच विवादित सीमा क्षेत्र अबेई में एक बाजार पर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले में पास में मौजूद एक ईंधन डिपो भी इसकी चपेट में आ गया। इससे 153 लोगों की मौत हो गई। आग भी लग गई, जो मंगलवार तक जल रही थी। एक स्थानीय अधिकारी ने यह जानकारी दी।
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अबेई प्रशासन के कार्यवाहक सूचना मंत्री योहाना अकोल नगोर ने सोमवार को हुए इस हमले के लिए सूडान की सेना को जिम्मेदार ठहराया। यह हमला अबेई शहर के उत्तर में स्थित अमीट बाजार पर हुआ था।

अकोल ने मंगलवार को फोन पर समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को बताया, हमने 153 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आग के कारण मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमले के पीछे का मकसद तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका। इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी कि हमला किसने किया था। 
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डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने क्या कहा?
'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' (एमएसएफ) संगठन ने कहा कि 20 से अधिक घायल लोगों को अमेथ बेक अस्पताल लाया गया। यहां एमएसएफ की टीमें दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य मंत्रालय के कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रही थीं। अस्पताल में एमएसएफ के चिकित्सा गतिविधियों के प्रबंधक डॉ. क्रिश्चियन लिंडाउर ने कहा, अब तक हमने 20 से अधिक मरीजों को भर्ती किया है। इनमें कई की हालत गंभीर है। जलने से घायल हुए मरीजों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सूडान के राजदूत को तलब किया
दक्षिण सूडान के विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले के लिए सूडान की सेना को जिम्मेदार ठहराया। मंत्रालय ने कहा कि हमले में बाजार के कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इससे आम नागरिकों की मौत हुई और संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा। 

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मंत्रालय ने कहा कि विरोध दर्ज कराने के लिए सूडान के राजदूत को तलब किया गया है। उसने सूडान से अपील की कि वह 'ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचे, जिससे आम नागरिकों की जान और संपत्ति खतरे में पड़ती हो'।  मंत्रालय ने यह भी कहा कि अबेई से जुड़े मुद्दों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए।

कब से जारी है संघर्ष?
सूडान की सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच अप्रैल 2023 से लड़ाई चल रही है। इस संघर्ष ने देश के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया है। इससे देश की सीमाओं पर स्थिरता को भी खतरा पैदा हो गया है।

अबेई प्रशासन के कार्यवाहक सूचना मंत्री अकोल ने बताया कि हमला सोमवार सुबह करीब 11 बजे हुआ था। उन्होंने कहा कि ईंधन डिपो से स्थानीय कारोबारियों को ईंधन की आपूर्ति की जाती थी। उन्होंने कहा, यह बेहद खौफनाक और हैरान करने वाली स्थिति है। एमएसएफ ने सभी पक्षों से आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने की अपील की। संगठन ने इस बात पर चिंता जताई कि लोग सुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंच पाएंगे या नहीं।

अबेई क्षेत्र को लेकर विवाद क्या है?
तेल से समृद्ध अबेई क्षेत्र की स्थिति 2005 के शांति समझौते के बाद भी अनसुलझी रह गई थी। इस समझौते ने दशकों से चल रहे गृहयुद्ध को समाप्त किया था। वर्ष 2011 में दक्षिण सूडान के स्वतंत्र देश बनने के समय भी इस क्षेत्र की स्थिति पर फैसला नहीं हो सका था। इस क्षेत्र को लेकर प्रस्तावित जनमत संग्रह इस विवाद के कारण रुक गया कि इसमें किसे मतदान करने का अधिकार मिलना चाहिए।
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अबेई की बहुसंख्यक न्गोक दिन्का आबादी दक्षिण सूडान में शामिल होने का समर्थन करती है। वहीं, अपने पशुओं को चराने के लिए यहां के चरागाहों का इस्तेमाल करने वाले मिसेरिया के खानाबदोश लोग सूडान में शामिल होने के पक्ष में हैं। अबेई में समुदायों के बीच जानलेवा हिंसा की घटनाएं भी हुई हैं। इनमें न्गोक दिन्का और पड़ोसी ट्विक दिन्का समुदायों के बीच जमीन को लेकर हुई लड़ाई भी शामिल है।
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