पाकिस्तान में जारी आतंकवादी हमलों के बीच अफगान तालिबान की भूमिका पर देश में संदेह गहराता जा रहा है। ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर तालिबान की नाराजगी दूर नहीं हुई है। इसके पहले पाकिस्तान सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि इस मसले पर तालिबान ने अपनी सहमति दे दी है। लेकिन अब ऐसी आशंका जताई जा रही है कि नाराज अफगान तालिबान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानिस्तान की जमीन पर अपनी गतिविधियां चलाने की खुली छूट दे दी है। मुख्य तौर पर टीटीपी को ही पाकिस्तान में होने वाले आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
अमेरिकी थिंक टैंक यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) ने बीते हफ्ते अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि बाड़ लगाने के सवाल पर तालिबान और पाकिस्तान सरकार के रिश्ते बेहद कड़वे हो गए हैं। इससे टीटीपी को भी अपने हमले तेज करने का मौका मिला है। इस रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर हुई एक चर्चा के दौरान यूएसआईपी से जुड़े विशेषज्ञ असफंदर मीर और पहले पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत रह चुके रिचर्ड ओलसन ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने राय पर सहमति जताई कि तालिबान ने टीटीपी पर लगाम लगाने की पाकिस्तान की मांग को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
बाद में असफंदर मीर ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से बातचीत में कहा कि टीटीपी को तालिबान के जारी समर्थन के कारण फिलहाल पाकिस्तान और तालिबान के संबंध कटु बने रहेंगे। उन्होंने कहा- ‘मुझे संबंध सुधारने की दिशा में निकट भविष्य में सफलता मिलने की संभावना नजर नहीं आती।’
यूएसआईपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाड़ लगाने से संबंधित अपने मकसद में पाकिस्तान की सेना सफल हो गई है। बाड़ लगाने पर 53 करोड़ 20 लाख डॉलर का खर्च आया है। डूरंड लाइन पर बाड़ लगाना पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा की खास योजना का हिस्सा था, जिस पर आने वाले खर्च की पाकिस्तान ने चिंता नहीं की।