डोनाल्ड ट्रंप ने गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड का एलान किया
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विदेशी हमले से बचाने के लिए अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस शील्ड
गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड से जुड़ी घोषणा को लेकर व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक वीडियो संदेश में ट्रंप ने कहा, 'यह कुछ ऐसा है जो हमारे पास होगा। हम इसे उच्चतम स्तर पर रखने जा रहे हैं... चुनाव प्रचार के दौरान, मैंने अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि मैं अपने देश को विदेशी मिसाइल हमले के खतरे से बचाने के लिए अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस शील्ड बनाऊंगा। हम आज यही कर रहे हैं।' प्रशासन के मुताबिक डोम की लागत 175 बिलियन डॉलर (लगभग 14.5 लाख करोड़ रुपये) आएगी।
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क्या है 'गोल्डन डोम' योजना?
गोल्डन डोम एक बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली है जिसका उद्देश्य मिसाइलों को चार अलग-अलग चरणों में रोकना है। इस योजना का सबसे नया और विवादास्पद पहलू यह है कि इसमें अंतरिक्ष में हथियार तैनात किए जाएंगे, जिससे मिसाइलों को उनकी उड़ान के किसी भी चरण में रोका जा सकेगा — चाहे वे अंतरिक्ष से ही क्यों न दागी गई हों।
- लॉन्च से पहले ही उन्हें नष्ट करना
- उड़ान की शुरुआत में रोकना
- मध्य आकाश में मिसाइल को गिराना
- लक्ष्य पर गिरने से ठीक पहले खत्म करना
अधिकारियों के साथ ट्रंप की बैठक
- फोटो : X @WhiteHouse
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ट्रंप का दावा- 2029 तक चालू हो जाएगी प्रणाली
डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से एलान करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि 2029 तक यह प्रणाली पूरी तरह चालू हो जाए, यानी उनके कार्यकाल के अंत तक। हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इतनी जटिल प्रणाली उस समय तक केवल प्रारंभिक रूप से कार्य करने योग्य हो सकती है।
कौन करेगा नेतृत्व और किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
इस परियोजना की निगरानी के लिए ट्रंप ने जनरल माइकल ग्वेटलाइन को जिम्मेदारी सौंपी है। वे वर्तमान में स्पेस ऑपरेशन्स के उप प्रमुख हैं।
'गोल्डन डोम' पर कितना खर्च आएगा?
जानकारी के मुताबिक, पूरे 'गोल्डन डोम' प्रोजेक्ट की लागत, लगभग 175 अरब डॉलर है। सिर्फ अंतरिक्ष आधारित हिस्से की अनुमानित लागत 542 अरब डॉलर (20 वर्षों में) है। वहीं ट्रंप ने प्रारंभिक खर्च के लिए 25 अरब डॉलर की मांग की है, जो कि उनके प्रस्तावित टैक्स बिल में शामिल है।
अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है गोल्डन डोम?
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) लंबे समय से यह चेतावनी देता आ रहा है कि चीन और रूस की मिसाइलें इतनी उन्नत हो गई हैं कि अब पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणाली से काम नहीं चलेगा। यही वजह है कि अब अमेरिका अंतरिक्ष से ही मिसाइलों को पहचानने और नष्ट करने की योजना पर काम कर रहा है। चीन और रूस ने अंतरिक्ष में ऐसे सैटेलाइट तैनात कर दिए हैं जो अमेरिकी सैटेलाइट्स को निष्क्रिय कर सकते हैं। रूस एक ऐसा परमाणु हथियार विकसित कर रहा है जो अंतरिक्ष में मंडरा सकता है और समय आने पर आसपास के सैटेलाइट्स को नष्ट कर सकता है।
ट्रंप की रूस से बातचीत?
इस बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अब तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस मुद्दे पर बात नहीं की है, लेकिन 'सही समय पर बात करेंगे।' हालांकि ट्रंप ने योजना चुन ली है, लेकिन पेंटागन अभी भी आवश्यकताओं का निर्धारण कर रहा है। सामान्यत: पहले रक्षा जरूरतें तय की जाती हैं, फिर परियोजना शुरू होती है, लेकिन ट्रंप सरकार ने उल्टी प्रक्रिया अपनाई है। यूएस नॉर्दन कमांड (जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है) अभी यह तय कर रहा है कि गोल्डन डोम से क्या-क्या करवाना है। यह सब एक प्रारंभिक क्षमता दस्तावेज में दर्ज किया जाएगा।
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पहले से मौजूद रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल
अमेरिका के पास पहले से ही कई मिसाइल रक्षा प्रणालियां हैं जैसे, पैट्रीअट मिसाइल सिस्टम – जिसे यूक्रेन में इस्तेमाल किया जा रहा है। सैटेलाइट नेटवर्क – जो मिसाइल लॉन्च का पता लगाने में सक्षम है। इनमें से कुछ प्रणालियों को गोल्डन डोम में शामिल किया जाएगा। बता दें कि, ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के पहले ही हफ्ते में एक कार्यकारी आदेश जारी कर अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए थे।