अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कोरोना महामारी को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के बाद उनके एक बयान से राजनीतिक गलियारे में काफी हलचल होने लगी थी। महामारी की घोषणा के वक्त ट्रंप ने कहा कि मेरे पास वो पॉवर जो आप लोग नहीं जानते हो, मैं किसी भी आदेश, निर्देश को बदल सकता हूं या पलट सकता हूं।
हालांकि ट्रंप की यह बात काफी हद तक सही है क्योंकि आपातकाल की स्थिति में किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री या सरकार को विशेष शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं। लेकिन ट्रंप द्वारा गलती से पूरी ताकत आ जाने की बात से अलग-अलग राज्यों के राज्यपालों में चिंता की लहर दौड़ गई।
इसकी वजह से दस सीनेटर यह पता करने में लग गए कि आपातकाल की स्थिति में देश के राष्ट्रपति को कितनी और क्या-क्या ताकतें मिल सकती हैं। उन्होंने इस प्रशासन के राष्ट्रपति के इमरजेंसी एक्शन दस्तावेज़ को देखने के लिए कहा। यह दस्तावेज गोपनीय होते हैं जो एक तरह से योजना से जुड़े हुए होते हैं।
दस्तावेज़ संविधान में राष्ट्रपति के अधिकार से परे नहीं हैं। लेकिन वे इस बात की रूपरेखा तैयार करते हैं कि राष्ट्रपति को यह मालूम हो कि संविधान उसे राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए क्या देता है। सीनेटरों को लगता है कि दस्तावेज उन्हें यह बताएंगे कि कैसे व्हाइट हाउस राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की व्याख्या करता है।
सीनेटर एंगस किंग, आई-मेन ने एक टेलीफोन साक्षात्कार में कहा, 'किसी को इन चीजों को देखने की जरूरत है। 'यह एक ऐसा मामला है जहां राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं और फिर कहते हैं, 'क्योंकि आपातकाल है, मैं यह कर सकता हूं, यह और यह।'
'चिंता का विषय यह है कि ऐसी कार्रवाई की जा सकती है जो संविधान के तहत व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करेगी,' जैसे कि नियत प्रक्रिया को सीमित करना, अनुचित खोज और बिना किसी कारण के व्यक्तियों को पकड़ना। 'मैं केवल अनुमान लगा रहा हूं। यह हो सकता है कि हमें ये दस्तावेज़ मिलें और उनके चेक और बैलेंस में कोई अनहोनी न हो और सब कुछ बोर्ड से ऊपर और उचित हो।