पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक और बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने साफ कहा कि इस टकराव के कारण अगर शेयर बाजार में गिरावट आती है या करोड़ों डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है तो यह वैश्विक सुरक्षा के सामने बहुत छोटी कीमत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पूरे संकट को उच्च स्तर की शतरंज की बिसात बताया, जहां वे बेहद चालाक और ताकतवर खिलाड़ियों से निपट रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते कड़े फैसले नहीं लिए गए तो परमाणु खतरा पूरी दुनिया के लिए कहीं ज्यादा बड़ा संकट बन सकता है।
और लंबा नहीं चलेगा युद्ध- ट्रंप
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध बहुत लंबा नहीं चलेगा और इसे जल्दी समेट लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह कदम मजबूरी में उठाया है। ट्रंप ने कहा कि यह ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। जब यह खत्म होगा तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी। मुझे यह कदम उठाने की जिम्मेदारी थी, भले ही मैं ऐसा करना नहीं चाहता था। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी देश को परमाणु हथियारों से हमला करने दिया जाए तो उसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।
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परमाणु हथियार पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि अगर आप शेयर बाजार को गिरते हुए देखना चाहते हैं, तो बस उन्हें आप पर परमाणु हथियार से हमला करने दीजिए। ट्रंप ने माना कि इस संघर्ष के कारण शेयर बाजार में कुछ गिरावट देखी गई है, लेकिन उनके अनुसार यह सुरक्षा के बड़े खतरे के सामने बहुत छोटी कीमत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े देशों के बीच यह एक तरह का उच्च स्तर का शतरंज का खेल है और इसमें बहुत समझदारी से फैसले लेने पड़ते हैं।
ट्रंप ने चीन ने क्यों की मदद की अपील?
इसके साथ ही ट्रंप ने चीन से एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्ग को फिर से खोलने में मदद करने की भी अपील की है। यह मार्ग है होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल की सप्लाई जाती है।
ट्रंप का कहना है कि चीन को भी इस मामले में मदद करनी चाहिए क्योंकि उसे अपने तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मिलता है। दूसरी ओर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी पहले संकेत दिया था कि मौजूदा वैश्विक तनाव के कारण ट्रंप की चीन यात्रा आगे बढ़ाई जा सकती है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच होने वाली बातचीत भी काफी अहम मानी जा रही है।
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चीन भी नहीं जाएंगे ट्रंप, जानिए क्यों?
इसके साथ ही अपने आगामी चीन दौरे को लेकर भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़े संकेत दिए हैं। उनका प्रस्तावित चीन दौरा कुछ समय के लिए टल सकता है। उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के लिए चीन जाना था, लेकिन मौजूदा हालात के कारण यह यात्रा लगभग एक महीने के लिए टाली जा सकती है। ट्रंप ने कहा कि मैं चीन जाना चाहूंगा, लेकिन अभी युद्ध जैसी स्थिति है इसलिए मेरा अमेरिका में रहना जरूरी है। इसलिए हमने इस यात्रा को लगभग एक महीने के लिए टालने का अनुरोध किया है।