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Gaza: ग्रीनलैंड मुद्दे से गाजा शांति योजना को खतरे में डाल रहे ट्रंप, यूरोप की नाराजगी पड़ सकती है भारी

Wed, 21 Jan 2026 07:52 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर जिस तरह का अड़ियल रवैया अपना रहे हैं, उसने कई यूरोपीय देशों को नाराज कर दिया है। इसके चलते ट्रंप की गाजा में शांति लाने और गाजा का विकास करने की महत्वकांक्षी योजना भी मुश्किल में पड़ गई है। जानिए कैसे...
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2025 का अंत इस्राइल-हमास के बीच संघर्ष विराम कराकर किया था और उन्होंने गाजा में विकास के लिए महत्वकांक्षी गाजा शांति योजना भी पेश की थी। ट्रंप प्रशासन ने 2026 की शुरुआत उत्साह के साथ की और गाजा शांति योजना के लिए बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों का एलान भी कर दिया। लग रहा था कि दुनिया का एक बड़ा विवाद हल होने की तरफ है, लेकिन ग्रीनलैंड का मुद्दा आक्रामक तरीके से उठाकर ट्रंप ने गाजा शांति योजना को खतरे में डाल दिया है। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के करीबी यूरोपीय देश नाराज हैं। 
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ट्रंप खुद ही बिगाड़ रहे खेल
  • डोनाल्ड ट्रंप ने पहले जनवरी के शुरुआती हफ्ते में वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने जैसा कदम उठाया। इस कदम को लेकर दुनियाभर के कई देशों ने ट्रंप सरकार की आलोचना की। इसके बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जे की बात करनी शुरू कर दी, जिससे नाटो सदस्य डेनमार्क समेत यूरोपीय देशों को भी नाराज कर दिया। 
  • स्थिति ये है कि ट्रंप की इस आक्रामक नीति से उनकी गाजा शांति योजना, बोर्ड ऑफ पीस का विस्तार और इस बोर्ड ऑफ पीस की मदद से दुनियाभर के कई संकटों को खत्म करने की योजना, सब खटाई में पड़ गए हैं। 
  • हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर समर्थन न देने के लिए यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का एलान किया था।
  • इस टैरिफ की धमकी ने कई यूरोपीय देशों को नाराज कर दिया था। फ्रांस ने जहां खुलेआम कहा कि यूरोप की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा। वहीं ब्रिटेन ने भी अमेरिकी सरकार के कदम की आलोचना की। 
  • अब ट्रंप ने नॉर्वे के पीएम पर आरोप लगाकर हालात को और मुश्किल बना दिया है।  
  • बोर्ड ऑफ पीस में बतौर सदस्य शामिल होने के लिए अमेरिका की तरफ से 60 से ज्यादा आमंत्रण भेजे गए हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 10 ने ही अभी तक इस आमंत्रण को स्वीकार किया है। 
ये भी पढ़ें- Protest Against Trump: ट्रंप के 'फैसलों' के खिलाफ सड़क पर जनता, सरकार के एक साल पूरा होने पर देशभर में विरोध
  • गौरतलब बात ये है कि अमेरिका के कई करीबी सहयोगी देशों जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी इसका सदस्य बनने से इनकार कर दिया है। इससे साफ है कि अमेरिका के करीबी सहयोगियों का विश्वास अब अमेरिका पर कम हो रहा है। 
  • इससे नाटो की कमजोरी के भी संकेत मिल रहे हैं। 
  • ट्रंप ने गाजा के बाद बोर्ड ऑफ पीस की मदद से रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने पर भी चर्चा शुरू कर दी है। इससे नाटो देशों को लग रहा है कि ट्रंप, पश्चिमी देशों की प्राथमिकताओं को भी खतरे में डाल रहे हैं। 
  • कई यूरोपीय देशों में इस बात की नाराजगी है कि बोर्ड ऑफ पीस में रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको को भी आमंत्रित किया गया है। 
  • पश्चिमी देशों को आशंका है कि बोर्ड ऑफ पीस आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है। जो पश्चिमी देशों को मंजूर नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने ये भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र ने एक भी युद्ध को रोकने में मदद नहीं की है।
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